शनिवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने पुलिस लाइन में आयोजित कार्यक्रम में ‘उत्तराखंड पुलिस मोबाइल एप’ को बटन दबाकर गढ़वाल रेंज के सात जिलों की जनता को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि एप की मदद से विषम परिस्थितियों में पुलिस की मदद पाई जा सकती है। शिकायत अथवा सत्यापन के लिए लोगों को अब थाने-चौकी जाने की जरूरत नहीं पडे़गी।
घर बैठे ही एप की मदद से ऑनलाइन ही अपनी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। वर्तमान में साइबर अपराधों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। उन्होंने अपराधियों की गिरफ्तारी के बाद की जटिल प्रक्रिया की चर्चा करते हुए पुलिस से अपराधियों में खौफ पैदा करने की अपेक्षा की।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि अपराधियों में कानून का खौफ होना जरूरी है। पुलिस तो काफी हद तक अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन कर रही है, लेकिन दूसरे स्तर की जटिल कुछ प्रक्रिया बाधा बन रही है। सीएम ने कहा कि अपराधियों से एक कदम सोचकर अपराध को नियंत्रित करने की जरूरत है। अन्य राज्यों से आधुनिक तैयार हुए मोबाइल एप से पुलिस और जनता के बीच फासला कम करने में काफी मदद मिलेगी। वह उत्तराखंड पुलिस के मोबाइल एप लांचिंग कार्यक्रम में बोल रहे थे।
सरदार पटेल के जन्मदिन पर लांच किया गया एप
गृह मंत्री प्रीतम सिंह ने कहा कि पुलिस और अत्याधुनिक बनाने के निरंतर प्रयास चल रहे हैं। पुलिस बाहरी और आतंरिक सुरक्षा में सफल रही है। पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू ने कहा कि छह माह पहले ही मोबाइल एप तैयार हो गया था, लेकिन उसकी कमियों को दूर कर पूर्व गृह मंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल के जन्म दिन पर लांच करने का निर्णय लिया गया।
प्रयोग के तौर पर एप को गढ़वाल के सातों जिलों में लागू किया जा रहा है। सार्थक परिणाम मिलने पर संपूर्ण राज्य में एप लागू कर दिया जाएगा। गढ़वाल रेंज के आईजी संजय गुंज्याल ने मोबाइल एप से जुड़ी सुविधाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
सफेदपोशों की संलिप्तता चिंताजनक
सीएम हरीश रावत ने अपराधों में सफेदपोशों की बढ़ती संलिप्तता पर चिंता जताते हुए कहा कि उन्हें पता है कि पुलिस को चौतरफा दबाव झेलना पड़ता है। किसी को पूछताछ के लिए लाए नहीं कि सफेदपोशों के फोन खटकने लगते हैं। उन्होंने आईजी संजय गुंज्याल के मोबाइल एप की सराहना करते हुए कहा कि उसका पूरा खर्च सरकार उठाएगी।
मोबाइल एप में कई सुविधाएं, ऐसे करें डाउनलोड
उत्तराखंड मोबाइल एप तैयार करने वाले आईजी संजय गुंज्याल ने बताया कि मोबाइल एप के जरिये, किराएदार, घरेलू नौकर को सत्यापन, मोबाइल अथवा दस्तावेज गुम होने, छेड़छाड़, सड़क दुर्घटना, अश्लील संदेश, आदि की शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। बरामद होने वाली लावारिस वस्तुओं का पूरा लेखा-जोखा एप पर रहेगा। साथ ही इनामी अपराधियों की सूची भी एप पर उपलब्ध रहेगी।
आसपास कोई संदिग्ध दिखता है तो एप पर उपलब्ध क्रिमनल के फोटो से मिलान किया जा सकता है। एप से थानों, अधिकारियों के अलावा वूमेन सेल, साइबर सेल, एंबूलेंस, फायर, आपदा कंट्रोल रूम आदि के नंबर भी प्राप्त किए जा सकते है। इस दौरान मुख्यमंत्री ने मोबाइल एप में अहम भूमिका निभाने वाले दारोगा यासीन समेत कई पुलिस कर्मियों को सम्मानित किया। एप्प के जरिये बरामद हुए पांच मोबाइल फोन भी उनके मालिकों केसुपुर्द किए गए।
ऐसे करे डाउनलोड
स्मार्ट फोन के यूजर तीन एमबी के उत्तराखंड मोबाइल एप नाम के इस एप को आसनी से गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड कर सकते है। इसके जरिये जब चाहे पुलिस की मदद पा सकते हैं।