फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विनियोग विधेयक से बचने को 'सरकार' भरेंगे आखिरी दम

Fri, 01 Jul 2016 02:24 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून

सार

  • दिल्ली में वित्त मंत्री से गुहार लगाएंगे मुख्यमंत्री
  • उत्तराखंड के आला अधिकारी भी बुलाए गए
विज्ञापन
हरीश रावत - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

विधानसभा में विनियोग विधेयक लाने से बचने के लिए मुख्यमंत्री हरीश रावत ने एक अंतिम प्रयास करने की तैयारी की है। इसके तहत वे शुक्रवार को दिल्ली में वित्त मंत्री अरुण जेटली से मिलेंगे। उनसे बजट को लेकर गुहार लगाई जाएगी। इस कवायद के लिए उत्तराखंड के तमाम बड़े अधिकारियों को सुबह-सुबह दिल्ली पहुंचने का फरमान सुनाया गया है।
विज्ञापन


खबर यह भी है कि विनियोग विधेयक को विधानसभा में लाने पर प्रश्नचिन्ह लगने के चलते यह फार्मूला आजमाया जा रहा है।

हाल की कैबिनेट बैठक में यह तय किया गया था कि 40422 करोड़ रुपए का बजट विधानसभा से पास कराया जाएगा। इसकी तैयारियां भी तेजी से शुरू हो गई थीं। मगर कहानी तब फंस गई जब विधानसभा में बजट पेश करने को लेकर ही सवाल खड़े हो गए।

दरअसल सियासी संकट के दौरान मुख्यमंत्री ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाए जाने के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने लिखित रूप से यह बात भी कही है कि राज्य सरकार का बजट पास है।
विज्ञापन
विज्ञापन

दोबारा बजट पास हुआ तो हरीश के सामने आएगा संकट

हरीश रावत - फोटो : अमरउजाला
बावजूद इसके दोबारा बजट पास कराए जाने की स्थिति में मुख्यमंत्री का हलफनामा झूठा साबित हो सकता है। यह स्थिति हरीश रावत के सामने नया संकट खड़ा कर सकती है। इसे देखते हुए अब केंद्र से बजट का ताला खुलवाने का एक अंतिम प्रयास किया जा रहा है। इसके तहत शुक्रवार को मुख्यमंत्री हरीश रावत पहले न्याय अधिकारिता मंत्री थावरचंद गहलोत से मिलेंगे।

उनसे एससी-एसटी वर्ग की स्कॉलरशिप समेत अन्य योजनाओं के मद में रुके पैसे को जारी करने की मांग करेंगे। इसके बाद दिन में 11 बजे वे मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह के अलावा लॉ सेकेट्री समेत अन्य प्रमुख अधिकारियों से मुलाकात करेंगे। इसके बाद सभी को लेकर वे वित्त मंत्री अरुण जेटली से मुलाकात करेंगे, जहां वे बजट न होने से राज्य में मौजूद आर्थिक संकट व विकास की अड़चनों का जिक्र करेंगे।

यदि बात बन जाती है तो विधानसभा सत्र में बजट का मसौदा नहीं रखा जाएगा और बात नहीं बनती है तो फिर एक नई मुश्किल से सामना होना तय है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें