पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने केदारनाथ में हो रहे कार्यों को धार्मिक परंपराओं के खिलाफ बताया। उन्होंने मंदिर परिसर को विकसित किए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इससे धाम की भव्यता खत्म हो गई है। उन्होंने पैदल मार्ग पर भी जरूरी सुविधाओं के नहीं होने पर रोष जताया।
मंदिर परिसर में जनसभा में पूर्व सीएम ने कहा कि प्रदेश सरकार तीर्थपुरोहितों से उनका रोजगार छीन रही है। मंदिर मार्ग और परिसर के विस्तार को लेकर विशेषज्ञों से राय लेनी चाहिए थी। मंदिर मार्ग को 50 फीट के बजाय 70 फीट चौड़ा किया गया है, जिससे मंदिर की भव्यता खत्म हो गई है। 30 फीट चौड़ाई में ही मंदिर की भव्यता नजर आ सकती थी।
धाम में कार्यों के दौरान धार्मिक परंपराओं से छेड़छाड़ की गई है। यहां होने वाले हर कार्य एएसआई के जानकार विशेषज्ञों से कराए जाने चाहिए थे, लेकिन केंद्र व राज्य सरकार लोनिवि से इन कार्यों को करवा रही हैं, जिसे परंपराओं का ज्ञान नहीं है।
मंदिर के मुख्य गेट पर टंगा घंटा भी हटा दिया गया है। उन्होंने लिनचोली से केदारनाथ तक रोपवे का निर्माण नहीं होने पर भी भाजपा सरकार को कोसा। कहा कि तीर्थपुरोहितों एवं केदारपुरी की समस्याओं के निस्तारण के लिए कांग्रेस आंदोलन करेगी। इस दौरान राज्य सभा सांसद प्रदीप टम्टा, केदारनाथ विस के विधायक मनोज रावत, पृथ्वीपाल सिंह चौहान आदि भी मौजूद थे।