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तीसरी बार में फ्लोर टेस्ट देने में सफल हुए रावत

Tue, 10 May 2016 10:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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हरीश रावत - फोटो : AmarUjala
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उत्तराखंड विधानसभा में मंगलवार को फ्लोर टेस्ट के पहले दो बार रावत के सामने से बहुमत परीक्षण का मौका आते-आते रह गया था। 28 मार्च को पहली बार फ्लोर टेस्ट की परीक्षा से गुजरने से रह गए हरीश रावत को आखिरकार दस मई को यह मौका मिला। 28 मार्च को फ्लोर टेस्ट से पहले ही प्रदेश में 27 मार्च को राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया था।
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इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंचा तो 21 अप्रैल को हरीश रावत एक दिन के लिए मुख्यमंत्री भी बने। 29 अप्रैल को फ्लोर टेस्ट का रावत को दूसरी बार मौका मिलना था पर सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने दस मई के लिए फ्लोर टेस्ट की तिथि तय की। इस बार हरीश रावत आखिरकार फ्लोर टेस्ट से गुजरने में कामयाब रहे।

उत्तराखंड का हाई वोल्टेज घटनाक्रम एक नजर में
18 मार्च 2016 : विधानसभा में धन विधेयक पर भाजपा ने मतदान की मांग की। इसे स्पीकर ने ठुकराकर बिल को ध्वनिमत से पारित करार दिया। इस पर कांग्रेस केनौ विधायकों ने बगावत कर भाजपा का समर्थन किया।
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19 मार्च : राज्यपाल ने सीएम हरीश रावत को बहुमत साबित करने के लिए 28 मार्च तक का समय दिया।
27 मार्च : उत्तराखंड में राष्ट्रपति शासन लागू। विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस के बागी नौ विधायकों की सदस्यता समाप्त कर दी।
29 मार्च : हाईकोर्ट ने राष्ट्रपति शासन के खिलाफ हरीश रावत की याचिका पर शक्ति परीक्षण के लिए 31 मार्च की तिथि तय की।
30 मार्च : 31 मार्च को होने वाले बहुमत परीक्षण पर हाईकोर्ट की दो जजों की पीठ ने सात अप्रैल तक रोक लगा दी।
21 अप्रैल : हाईकोर्ट ने राष्ट्रपति शासन को खारिज कर हरीश रावत को 29 अप्रैल को सदन में बहुमत साबित करने को कहा।
22 अप्रैल : राष्ट्रपति शासन को खत्म करने, सरकार बहाल करने के हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई।
6 मई : सुप्रीम कोर्ट ने 10 मई को हरीश रावत को शक्ति परीक्षण करने का आदेश दिया।
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