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नीति आयोग में बोले हरीश, 'चाहिए विशेष राज्य का दर्जा'

Mon, 09 Feb 2015 02:41 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली, देहरादून
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नीति आयोग की बैठक में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उत्तराखंड के विकास का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि 12वीं पंचवर्षीय योजना में उत्तराखंड समेत कुछ राज्यों को विशेष दर्जा दिया गया था, इस व्यवस्था को बरकरार रखा जाना चाहिए।
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रावत ने गोमुख से उत्तरकाशी तक 100 किमी के संवेदी क्षेत्र (इको सेंसिटिव जोन) की अधिसूचना रद्द करने और लंबित जल विद्युत परियोजनाओं को स्वीकृति देने की भी बात कही। ग्रीन बोनस का भी दावा किया। यही नहीं, सीएम ने उत्तराखंड में भी नीति नियोजन समूह का गठन करने की मांग की।

रविवार को दिल्ली में हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने योजना आयोग की बीके चतुर्वेदी कमेटी की संस्तुतियों को लागू करने की मांग की। ग्रीन बोनस की मांग करते हुए तर्क दिया कि उत्तराखंड अन्य राज्यों को इको सर्विसेज के रूप में 16 लाख करोड़ रुपये की सेवा दे रहा है।
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रावत ने केंद्रीय हिमालयी परिषद का गठन, चीन और नेपाल से लगी सीमा पर यातायात (सड़क, रेल और हवाई) विकसित करने, पंतनगर को अंतरराष्ट्रीय कार्गो और जौलीग्रांट को अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा बनाने की भी मांग उठाई। यही नहीं, सीएम ने कहा कि राज्य को नदियों से रेत, बजरी, बोल्डर का चुगान की अनुमति दी जाए।

नदियों के दोहन को खनन की श्रेणी से बाहर रखें। गंगोत्री संवेदी क्षेत्र की चर्चा करते हुए कहा कि इससे पलायन बढ़ेगा। इसलिए इसकी अधिसूचना रद्द होनी चाहिए। आपदा से प्रभावित 337 गांवों के लिए भी पैकेज की भी मांग की।
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दर्जा समाप्त होने की है आशंका

उत्तराखंड को राज्य गठन के समय से ही विशेष राज्य का दर्जा दे दिया गया था। इसकेतहत राज्य को बाहरी सहायता वाली योजनाओं में कुल लागत का सिर्फ 10 प्रतिशत राज्यांश के रूप में वहन करना होता है। शेष 90 प्रतिशत केंद्र सरकार वहन करती है। योजना आयोग को भंग करने के साथ यह चर्चा भी है कि केंद्र सरकार विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर सकती है।

स्मार्ट सिटी के मानक शिथिल करें
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश को स्मार्ट सिटी के मानक में शिथिलता दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि चार धाम यात्रा, कुंभ, अर्द्धकुंभ के दौरान करोड़ों लोग आते हैं। शहरी विकास की योजनाओं को बनाते समय इसका भी ध्यान रखा जाना चाहिए।

पूर्वोत्तर परिषद की तर्ज पर हिमालयी परिषद गठित हो
रावत ने पूर्वोत्तर परिषद की तर्ज पर हिमालयी परिषद के गठन का भी सुझाव दिया, जिसमें उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू कश्मीर को शामिल करने की बात कही। हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने पर्वतीय राज्यों के लिए स्थायी क्षेत्रीय परिषद तथा अलग से हिल डिवीजन सृजित करने की मांग की।
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