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हरीश कैबिनेट के प्रमुख फैसले, पढ़िए एक नजर में

Sat, 28 Mar 2015 01:26 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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कैबिनेट ने नई आबकारी नीति को मंजूरी दे दी है। नई नीति 15 अप्रैल से लागू होगी। तब तक पुरानी आबकारी नीति ही चलती रहेगी। सरकार ने वित्तीय वर्ष 2015-16 में आबकारी से 1800 करोड़ रुपये राजस्व हासिल करने का लक्ष्य रखा है जो वर्तमान राजस्व से 20 फीसदी अधिक होगा। शुक्रवार देर रात उत्तराखंड कैबिनेट की बैठक में इस फैसले पर मुहर लगी।
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कैबिनेट ने एफएल-2 को लेकर मुख्यमंत्री की अध्यक्षता (आबकारी मंत्री) में मंत्रिमंडल की उपसमिति भी गठित की है जिसमें हरक सिंह रावत, दिनेश धनै और यशपाल आर्य शामिल हैं। वहीं, एफएल-2 का संचालन गढ़वाल और कुमाऊं मंडल विकास निगम को देने पर फैसला हुआ है। उप समिति एफएल-2 पर करीब एक माह में फैसला ले लेगी जिससे 30 अप्रैल से एफएल-2 को लागू किया जा सके।

मृतक आश्रितों को समूह घ में नौकरी
राज्य कर्मचारियों के सेवाकाल में मृत्यु के बाद आश्रितों को वर्ग ग और घ में नौकरी देने का रास्ता भी कैबिनेट ने साफ कर दिया है। पिछले वेतन आयोग ने समूह घ की भर्तियां समाप्त कर दी हैं बावजूद कैबिनेट ने उन्हें भर्ती में छूट देकर नियुक्ति का फैसला लिया है।
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अंग्रेजी और रोजगार परक शिक्षा पर जोर

प्रोजेक्ट उत्कृष्ट के तहत कॉलेजों में रोजगार परक शिक्षा के साथ अंग्रेजी प्रशिक्षण देने का फैसला लिया है।
पर्वतीय क्षेत्रों में निजी विवि को आमंत्रित करने के लिए मानकों को अधिक शिथिल करने का फैसला लिया इस संबंध में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हाई पावर कमेटी गठित की गई है ताकि त्वरित गति से फैसला लिया जा सके।

सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े प्रोडक्ट्स पर वैट में मिलने वाली छूट एक साल के लिए बढ़ाकर 31 मार्च 2016 तक कर दी गई है। उम्मीद है कि इसके बाद जीएसटी लागू हो जाएगा।

कुछ अन्य फैसले
ईको टूरिज्म से संबंधित नीति पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी गठित इसमें वन-पर्यावरण और वित्त विभाग चर्चा कर के अंतिम रूप देंगे।
नगर निगम अल्मोड़ा के तहत बनाए गए टैक्सी स्टैंड के लिए हडको से लिया ऋण एक मुश्त माफ किया जाएगा।

पेयजल निगम के 443 कर्मचारियों के नियमितीकरण का मामला मुख्य सचिव की अध्यक्षता में गठित कमेटी को सौंप दिया गया है। मुख्य सचिव अन्य महकमों के साथ चर्चा कर एक नीति तैयार करेंगे ताकि पीडब्ल्यूडी, सिंचाई आदि विभागों में एक जैसा नियमितीकरण हो सके।
प्रदेश की 83 स्थानीय निकाय/पालिकाओं में केंद्रित सेवा का पुनर्गठन।
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