हल्द्वानी में बच्ची से दुष्कर्म और हत्या ने सीएम को भी विचलित कर दिया। प्रदेश के आला अफसरों को बुलाकर सीएम ने आड़े हाथ लिया। सीएम ने गुस्से में कहा, यदि हालात नहीं सुधरे तो सबको हटा दूंगा। और आप से कुछ नहीं होता तो कुर्सी छोड़ दीजिए।
शासन के वरिष्ठ और आला पुलिस अफसरों को सदन से लेकर सड़क तक दरिंदगी मुद्दे पर घिरी सरकार के मुखिया के कोप का सामना करना पड़ा। सीएम ने गृहमंत्री प्रीतम सिंह, मुख्य सचिव एन रविशंकर, अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा, प्रमुख सचिव मुख्यमंत्री ओमप्रकाश, प्रमुख सचिव गृह एमएच खान, डीजीपी बीएस सिद्धू, एडीजी प्रशासन अनिल रतूड़ी की मौजूदगी में सबको लताड़ा।
‘डीजीपी से मुझे जवाब चाहिए’
सीएम ने डीजीपी से कहा चकराता में प्रेमी युगल की हत्या की ने मुझे देश भर में शर्मिंदा किया। बोले, क्या समझते हो, मैं हरिद्वार के फेरूपुर की नाबालिग की हत्या को भूल गया, मुझे जवाब चाहिए। नानकमत्ता में प्रेमी युगल की हाथ पैर कटी लाशें मिली, आखिर क्यों हुआ यह सब।
हल्द्वानी में जिस बच्ची को पुलिस ने नदी में बहा मान लिया उसकी लाश वहीं जंगल से बरामद हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि थानाध्यक्षों पर वरिष्ठ अफसरों का नियंत्रण नहीं है। अंत में डीजीपी से कहा मेरी सख्ती का मैसेज पहुंचा दीजिए, वर्ना मुझे थानेदारों की बैठक बुलानी पड़ेगी।
प्रमुख सचिव गृह को दी हटाने की धमकी
गृह विभाग निष्क्रिय, थानों के प्रस्ताव लंबित। दो अक्तूबर को पुलिस कर्मियों के लिए की घोषणा के आदेश नहीं। यदि हफ्ते में सारे प्रपोजल क्लियर नहीं हुए तो फिर कोई दूसरा प्रमुख सचिव गृह ही यह काम करेगा। प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी के बीच भी संवादहीनता का अंदाजा भी मुझे है।
(प्रमुख गृह सचिव एमएच खान की क्लास लगाते हुए)
‘एंटी माइनिंग फोर्स के मायने नहीं’
मुख्यमंत्री ने कहा कि हरिद्वार में एएसपी पर खनन माफिया का हमला इस बात का उदाहरण है कि जिले केवरिष्ठ अफसरों ने इसके लिए कोई योजना नहीं बनाई। खनन माफियाओं के बढ़े हौसले दर्शाते है कि एंटी माइनिंग फोर्स के कोई मायने नहीं है।
‘राज्य में इंटेलीजेंस विभाग मृतप्राय’
इंटेलीजेंस विभाग सरकार पर बोझ बन गया है। दूसरी गतिविधियों की तो दूर, अपराधिक घटनाओं की सूचना भी इसके पास नहीं होती। मुखबिर सिस्टम ध्वस्त हो चुका है।
‘कभी संयुक्त अभियान चलाते नहीं देखा’
राज्य में प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी ने कोई संयुक्त रिव्यू नहीं किया। मैंने कभी डीएम, एसएसपी, एसडीएम व सीओ को संयुक्त अभियान चलाते आज तक नहीं देखा। देहरादून में ही तमाम बिल्डरों ने सरकारी भूमि कब्जा ली। डीएम, वीसी एमडीडीए क्या कर रहे हैं, पूरा शहर अवैध निर्माण की बाढ़ से अनियोजित हो गया।
सभी नए थानों का प्रस्ताव मंजूर
सीएम ने कहा कि गृह विभाग फाइलें भी आगे नहीं बढ़ाता। शासन में 29 नए थानों का प्रस्ताव लंबित है, मैं सभी को मंजूरी दे रहा हूं, एक सप्ताह के भीतर फाइल बनकर नहीं आई तो फिर देखूंगा क्या करना है।
आईजी जेल पर भड़के एसीएस
एसीएस राकेश शर्मा ने कहा कि जेलों में कुछ ठीक नहीं है। जो लोग पहाड़ स्थानांतरित किए गए थे उन्हें आईजी जेल विनोद शर्मा ने अपने कार्यालय से अटैच कर लिया। यह कैसे हुआ और किसी अनुमति से किया गया।
मुख्य सचिव करेंगे हर 15 दिन में समीक्षा
लॉ एंड ऑर्डर के मामले में सीएम ने प्रमुख सचिव गृह व डीजीपी को किनारे कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत मुख्य सचिव हर पंद्रह दिन में पूरे राज्य की क्राइम रिव्यू मीटिंग लेंगे।
इसके अलावा पुलिस विभाग के गृह विभाग में लंबित प्रस्तावों पर हर सोमवार को बैठक बुलाने के लिए अपर मुख्य सचिव राकेश शर्मा को अधिकृत कर दिया गया। इस बैठक में प्रमुख सचिव व डीजीपी दोनों मौजूद रहेंगे।
मीटिंग के अलावा भी है कुछ सवाल
पिछले एक साल में मौजूदा डीजीपी बीएस सिद्धू ने क्राइम कंट्रोल के लिए राज्य के तेरह जनपदों की कोई क्राइम रिव्यू मीटिंग नहीं ली।
एक ओर क्राइम नहीं रुक रहा और डीआईजी गढ़वाल के पास एंटी माइनिंग फोर्स के सीईओ का चार्ज क्यों है, विधानसभा सत्र शुरू होने से खत्म होने तक डीआईजी रेंज संजय गुंज्याल क्यों विधानसभा में ही जमे रहे। क्राइम तो हरिद्वार, देहरादून जिलों में हो रहा था, वहां क्यों नहीं गए।
रुड़की में पिछले दिनों सही अभियुक्तों को गिरफ्तार करने पर विधायक फुरकान के दबाव में क्यों हटाए गए पुलिस वाले।