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चुनावी वर्ष में घोषणाओं पर चल सकती है कैंची

Fri, 19 Aug 2016 09:50 AM IST
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून
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हरीश रावत - फोटो : AmarUjala
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उत्तराखंड शिक्षा विभाग से जुड़ी मुख्यमंत्री की नई तो दूर पुरानी घोषणाओं पर भी अमल नहीं हो पा रहा है। कुछ को अब विलोपित कर दिया गया है, तो अन्य घोषणाओं को पूरा करने के लिए बजट की कमी आड़े आ रही है। इससे बागी और अब भाजपा का दामन थाम चुके पूर्व विधायकों के क्षेत्रों की घोषणाओं पर कैंची चल सकती है।
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प्रदेश में 175 स्कूलों को अनुदान सूची में शामिल करने के बाद स्कूलों को अब तक पूर्ण अनुदान नहीं मिल पाया है। वहीं, आठ सौ से अधिक अपग्रेड जूनियर हाईस्कूलों के अलग संचालन की मुख्यमंत्री की घोषणा भी अधर में है। शिक्षा विभाग के लिए अब 122 विद्यालयों के उच्चीकरण की मुख्यमंत्री की घोषणा को बजट की कमी के चलते पूरा करना मुश्किल है।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस पर हर साल 43 करोड़ व्यय आएगा। स्कूलों का निर्माण और मरम्मत कार्य भी बजट की कमी के चलते पूरा नहीं हो पा रहा है। निर्माण मद में माध्यमिक शिक्षा विभाग को सौ करोड़ की आवश्यकता है, लेकिन इस मद में विभाग के पास मुश्किल से दो करोड़ रुपये हैं।
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वर्ष 2011 में भाजपा सरकार में अपग्रेड हुए 79 स्कूलों में शिक्षकों का मामला भी अधर में हैं। मुख्यमंत्री के कई बार के निर्देश के बावजूद इन स्कूलों में शिक्षकों की व्यवस्था आज तक नहीं हो पाई है।
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बेसिक शिक्षा विभाग में कुछ इस तरह की घोषणाएं थीं, जिसे पूरा नहीं किया जा सकता था। यही वजह है कि इन घोषणाओं को विलोपित कर दिया गया है। 
- सीमा जौनसारी, शिक्षा निदेशक बेसिक शिक्षा विभाग 

स्कूलों की मरम्मत के लिए गैर सरकारी संगठनों से सहयोग लिया जाएगा। विभाग की ओर से भी प्रयास किए जा रहे हैं कि जल्द स्कूलों की मरम्मत की जा सके।
- मंत्री प्रसाद नैथानी शिक्षा मंत्री
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