ईडी का हरीश रावत के ओएसडी रहे चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर छापा उनके यहां से नकदी और अन्य कीमती चीजों की बरामदगी उनके शेष राजनीतिक सफर का पीछा करेगी। रावत भले ही खुद को पार्टी के पदों पर बने रहने से राहुल गांधी के भ्रष्टाचार की लड़ाई में बाधा के रूप में देख रहे हैं लेकिन पार्टी में उनके संन्यास की सुपारी ले चुके उनके चितकबरे चहेतों को राजनीतिक अवसर मिला है।
जीना के ठिकानों पर छापा यूकेएसएसएससी वीपीडीओ भर्ती परीक्षा 2016 में ओएमआर शीट से छेड़छाड़ और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई है ऐसे में शुद्धिकरण को लेकर घिरी भाजपा को चुनावी हथियार के रूप में दाग मिल गया है। अगर जीना को लेकर ईडी और कुछ खंगालती है या मामला लंबा खिंचता है तो भाजपा चुनाव में रावत और कांग्रेस को खींचने में गुरेज नहीं करेगी।
हरीश रावत ने अपने जीवन में कई राजनीतिक लड़ाइयां लड़ीं। कई चुनावी हार के बाद भी टूटे नहीं और सक्रियता बनाए रखी। उनकी पार्टी के नेतृत्व ने उन्हें बहुत मौके भी दिए और विश्वास भी किया है। रावत ने पार्टी के अन्य नेताओं की तरह कभी चोला भी नहीं बदला। अब उन्हें फिर राजनीतिक परीक्षा से गुजरकर खुद को पार्टी के सामने नए तरीके से अपने को सदस्य साबित कर नए समर में उतरना होगा।