हरिद्वार के सांसद से मुख्यमंत्री बने हरीश रावत की चरण पादुकाएं संसदीय क्षेत्र में कौन उठाएगा, इस पर चर्चाएं शुरू हो गयी हैं।
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कुछ दिन पहले ही मुख्यमंत्री ने स्वयं स्वीकार किया था कि वे हरिद्वार में किसी नेता को तैयार नहीं कर पाए हैं। माना जा रहा है कि रावत की संसदीय विरासत अगले चुनाव में उन्हीं के परिवार के किसी व्यक्ति के हवाले होगी।
हरिद्वार का बढ़ाया मान
हरिद्वार के सांसद के रूप में रावत ने जहां भारत सरकार के विभिन्न महत्वपूर्ण मंत्रालयों की शोभा बढ़ाई, वहीं हरिद्वार से जुड़ा पहला नेता मुख्यमंत्री पद पर आसीन हुआ है।
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उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के जमाने में हरिद्वार के कईं नेता प्रदेश में मंत्री पदों पर पहुंचे। काजी मोईयुद्दीन, स्वर्गीय पृथ्वी सिंह विकसित, मदन कौशिक सहित कईं नेताओं ने मंत्रिमंडलों में स्थान प्राप्त किया।
हरीश रावत एक मात्र ऐसे नेता रहे जिन्हें केंद्र में व्यापक सम्मान मिलने के बाद प्रदेश में सबसे बड़ी कुर्सी पर आसीन होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
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सभी की निगाहें आगामी संसदीय चुनाव में साथ-साथ विधानसभा के उपचुनाव पर भी लगी हैं। अटकलों का दौर अभी से शुरू हो चुका है।
पत्नी या पु्त्री को संसद भेजने की तैयारी
विगत दिनों हरीश रावत ने बाकायदा प्रेसवार्ता आयोजित कर स्वीकार किया था कि हरिद्वार में कोई नेतृत्व खड़ा नहीं कर पाए।
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माना जा रहा है कि वे अपनी पत्नी या पुत्री के बीच से किसी को संसदीय चुनाव लड़ाएंगे। रावत स्वयं भी विधानसभा का उपचुनाव हरिद्वार जनपद की किसी सीट से लड़ सकते हैं।