फिल्मी अंदाज में चलती है स्टेशन के बाहर दादागिरी
रेलवे स्टेशन और बस स्टेशन के बीच किसकी दुकान लगनी है, फुटपाथ पर किसका कब्जा होना है इसका निर्धारण वहां के कुछ गिरोह और उनसे जुड़े सदस्य करते हैं। हालत यह है कि नाले के ऊपर किसकी दुकान लगेगी। उसके आगे फुटपाथ पर किसी और किसे आधे रोड पर पसर कर गुब्बारा, बांसुरी और खिलौने बेचना है यह सभी तय करते हैं। सक्रिय गिरोह के लोग। रेलवे पुलिस की फोर्स केवल अपने चहारदीवारी तक सीमित रहती है। जबकि स्थानीय पुलिस का एक होमगार्ड भी इस परिसर के बीच नहीं दिखता है। कई बार तो रोडवेज की बस स्टेशन में प्रवेश और निकास के दौरान आधे-आधे घंटे तक फंसी रहती है, लेकिन सड़क पर कब्जा जमाए टैक्सी चालक अपनी मन मर्जी के मुताबिक रास्ता देते हैं।