अपर सचिव जीबी ओली ने सराय स्थित 14 एमएलडी के हाइब्रिड एम्यूनिटी सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के अनुरक्षण और संचालन की तकनीकी जांच के आदेश दिए हैं। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अनु सचिव दीपक कुमार के निरीक्षण के दौरान प्लांट में कई कमियां पाई गई थी। पिछले साल दिसंबर माह में केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस प्लांट का लोकार्पण किया था।
नमामि गंगे परियोजना के तहत ज्वालापुर के सराय में 41.40 करोड़ की लागत से 14 एमएलडी का एसटीपी प्लांट बनाया गया था। प्लांट का अनुरक्षण और संचालन पेयजल निगम कर रहा है। 27 नवंबर को पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अनुसचिव दीपक कुमार ने प्लांट का निरीक्षण किया था। इस दौरान एसटीपी प्लांट से उपचारित जल की गुणवत्ता पर उन्होंने संदेह जताया था।
वहीं सीवेज ट्रीटमेंट के बाद भी सीवर का कीचड़ सी-टेक टैैंक में दिखाई दिया। शोधित जल से अधिक झाग भी पैदा हो रहा था। जब अनुसचिव ने संबंधित टेक्नीशियन से इसका कारण पूछा तो बताया गोबर की मात्रा अधिक होने के कारण पानी की गुणवत्ता में अंतर आ रहा है।
अनुसचिव ने जब सुधार कार्य को लेकर जानकारी मांगी थी तो टेक्नीशियन संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों पर अब अपर सचिव जीबी ओली ने पेयजल निगम के प्रबंध निदेशक वीसी पुरोहित को प्लांट के अनुरक्षण और संचालन कार्यों की जांच के आदेश जारी किए हैं। (संवाद)
पुराने प्लांट के संचालन पर जलसंस्थान की तारीफ
पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अनु सचिव दीपक कुमार ने सराय में 18 एमएलडी के पुराने एसटीपी प्लांट को भी देखा था। प्लांट से उपचारित जल की गुणवत्ता से वे काफी संतुष्ट नजर आए। उन्होंने कहा प्लांट के पानी की पारदर्शिता को देखकर ही गुणवत्ता का अंदाजा लगाया जा सकता है। अनुसचिव ने कहा कि पुराना होने बावजूद प्लांट नए प्लांट से बेहतर काम कर रहा है। पुराने प्लांट का अनुरक्षण और संचालन जलसंस्थान गंगा अनुरक्षण इकाई के द्वारा किया जा रहा है।