कई कार चालक शीशा डाउन कर कल्पना को सैल्यूट भी करते हैं। नियमों को तोड़ने वालों का चालान करने और फटकारने के बजाय समझाती हैं। कोई छोटा हो या बड़ा, सबको बाबू शब्द से संबोधित करती हैं। उनका व्यवहार देख यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले खुद को गुनहगार समझकर फिर कभी नियमों का उल्लंघन न करने का संकल्प भी लेते हैं।
कल्पना के व्यवहार और ईमानदारी से ड्यूटी निभाने का हर कोई कायल है। इनमें पुलिस के आला अफसर और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक भी शामिल हैं। मदन कौशिक सम्मानित भी कर चुके हैं। चौराहों से गुजरने वाले अफसर कल्पना के सम्मान में सैल्यूट भी करते हैं।
कल्पना मूल रूप से अलीगढ़ की रहने वाली हैं। उनके बेटे मुकुल एमबीए द्वितीय वर्ष के छात्र हैं जबकि बेटी अभिलाषा एमबीए की पढ़ाई पूरी कर चुकी हैं। कल्पना बताती हैं कि वह सुबह दस से शाम छह बजे तक भगत सिंह चौक, रानीपुर मोड़, ऋषि चौक और शंकर आश्रम चौक पर ड्यूटी करती हैं।