हरिद्वार सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय से धर्मशालाओं की खरीद फरोख्त और अवैध कब्जों से संबंधी पत्रावलियां गायब हो गई हैं। सूचना के अधिकार अधिनियम (आरटीआई) में सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय की ओर से पत्रावलियां उपलब्ध नहीं कराए जाने पर इसका खुलासा हुआ है। सूचना आयोग में अपील पर हुई सुनवाई के बाद जिलाधिकारी ने पत्रावलियों की रिपोर्ट तलब की है। इससे धर्मशालाओं की बिना अनुमति खरीद फरोख्त करने वालों में हड़कंप मचा है।
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अखिल भारतीय धर्मशाला प्रबंधक सभा के अध्यक्ष रमेश चंद्र शर्मा ने सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय से आरटीआई के अंतर्गत हरिद्वार में धर्मशालाओं की खरीद फरोख्त और अवैध कब्जों से जुड़ी पत्रावलियों की जानकारी मांगी थी। रमेश चंद्र शर्मा का आरोप था कि लॉकडाउन के दौरान श्रवणनाथ नगर स्थित 200 साल पुरानी धर्मशाला को तोड़कर होटल बना दिया। इसी तरह कई धर्मशालाओं पर कब्जे और खरीद फरोख्त कर उनका स्वरूप परिवर्तन कर कांपलेक्स और होटल बनाए गए।
सिटी मजिस्ट्रेट कार्यालय ने आरटीआई के जवाब में धर्मशालाओं की बिक्री और कब्जों से संबंधित जांच पत्रावलियां उपलब्ध होने से इनकार कर दिया। रमेश चंद्र शर्मा ने सूचना आयोग में अपील की। कहा कि धर्मशालाओं की खरीद फरोख्त में अनियमितताएं हुई हैं। खरीद फरोख्त से जुड़ी जांच पत्रावलियां गायब हैं। मामला हरिद्वार में कई धर्मशालाओं से जुड़ा है।
मुख्य सूचना आयुक्त अनिल पुनेठा ने जिलाधिकारी हरिद्वार से यथोचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी विनय शंकर पांडेय ने सिटी मजिस्ट्रेट से आयोग के आदेश के अनुपालन में धर्मशालाओं की बिक्री एवं कब्जों से जुड़ी जांच पत्रावलियां तलब की हैं।