उधर, इस मामले में स्वामी रामदेव से संपर्क किया गया तो उन्होंने ट्वीट को ही अपना बयान बताया। ट्वीट में उन्होंने कहा है कि ‘मैं जन्म से ही पाखंड और अंधविश्वास का घोर विरोधी हूं। वेद धर्म और ऋषि धर्म के अनुरूप आचरण करना ही अपना संन्यास धर्म और सनातन धर्म मानता हूं।
मुझसे प्रेम करने वाले कर्नाटक के दो सज्जन पिरान कलियर गए थे। कुछ लोग ईर्ष्या और षड्यंत्र पूर्वक मुझे बदनाम करने के लिए झूठे आरोप लगा रहे हैं। हिंदू विरोधी लोग दुष्प्रचार और षड्यंत्र करें तो यह समझ में आता है, लेकिन अपने ही लोग अपनों से बैर विरोध करें तो बहुत आश्चर्य होता है।
ईश्वर हम ऋषियों की संतानों को संगठित रहने और प्रीतिपूर्वक जीने का आशीर्वाद दें।’ बता दें कि 17 दिसंबर से 19 दिसंबर तक हरिद्वार में आयोजित धर्म संसद में महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद और शांभवी पीठाधीश्वर स्वामी आनंद स्वरूप ही वक्ता थे।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी के सचिव श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रति अभद्र टिप्पणी करने वाले कालीचरण को फर्जी संत बताया है। उन्होंने कहा कि कालीचरण का बयान निंदनीय है। सभी ने उनकी निंदा की है। सरकार कानून के हिसाब से कार्रवाई कर रही है। ऐसे फर्जी संतों के खिलाफ सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। अखाड़ा परिषद भी जल्द बैठक कर फर्जी संतों की सूची बनाकर सरकार को देगा और खुद भी कार्रवाई करेगा।
शुक्रवार को श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल में संतों की बैठक में श्रीमहंत रविंद्र पुरी ने हरिद्वार में आयोजित धर्म संसद को लेकर उठे विवाद पर कहा कि संत विभिन्न अखाड़ों से भी जुड़े हैं। अखाड़ा परिषद की ओर से संतों को भाषा और आचरण पर नियंत्रण रखने की हिदायत दी गई है। श्री पंचायती अखाड़ा निर्मल के अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञानदेव सिंह ने कहा कि संत समाज ने हमेशा समाज का मार्गदर्शन कर राष्ट्र को नई दिशा प्रदान की है। राष्ट्र की एकता और अखंडता बनाए रखने के लिए संत समाज को एकजुट होकर प्रयास करने होंगे।
बाबा बलराम दास हठयोगी ने कहा कि संतों को बोलते समय ध्यान रखना चाहिए कि उनकी वाणी से किसी की भावनाओं को ठेस न पहुंचे। संत परंपरा से कोई संबंध नहीं रखने वाले कालीचरण जैसे फर्जी संत अनर्गल बयानबाजी कर सामाजिक सद्भाव खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। भगवा चोला पहनकर और अनर्गल बयानबाजी कर समाज को भ्रमित करने वाले फर्जी संतों के खिलाफ अखाड़ा परिषद को कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए। इस दौरान कोठारी महंत जसविंदर सिंह, महंत अमनदीप सिंह, ज्ञानी महंत खेम सिंह, संत निर्भय सिंह, संत सिमरन सिंह, संत हरजोध सिंह, संत जसकरन सिंह, संत तलविंदर सिंह, संत सुखमन सिंह, संत विष्णु सिंह आदि मौजूद थे।