राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क से सप्तऋषि क्षेत्र में गंगा में बहकर आए घायल हाथी की बुधवार को मौत हो गई। पार्क के चिकित्सक डॉ. अमित ध्यानी और डॉ. अदिति ने हाथी का पोस्टमार्टम किया और सैंपल जांच के लिए भेजे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हाथी के मौत के कारण स्पष्ट हो पाएंगे।
मंगलवार की सुबह करीब सात बजे पार्क की सीमा से लगे सप्तऋषि क्षेत्र में गंगा में बहकर आए हाथी को कड़ी मशक्कत के बाद शाम करीब छह बजे बेहोश किया गया था। इसके बाद पार्क के अधिकारी उसके उपचार में जुटे रहे। बताया जाता है कि रात को ही हाथी उपचार के दौरान जमीन पर जा गिरा और फिर खड़ा नहीं हो सका।
राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क के वन्यजीव प्रतिपालक और हरिद्वार वन प्रभाग के वन क्षेत्राधिकारी दिनेश नौडियाल ने बताया कि चीला रेंज में आपसी संघर्ष में हाथी गंभीर से घायल हो गया था। इसके बाद हाथी बाहर निकल आया था। हाथी के शरीर पर गहरे घाव होने के कारण उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
वन और पार्क के कार्यशैली पर भी उठ रहे सवाल
हाथी की मौत केे लेकर वन प्रभाग और राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क प्रशासन के अधिकारियों की कार्यशैली को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। मंगलवार की सुबह गंगा में बहकर आए हाथी को गंगा से निकालने और उसे बेहोश करने में पूरा दिन लग गया। यदि समय से हाथी को गंगा से निकालकर उसे बेहोश कर ठीक तरह से उपचार किया जाता तो उसकी जान बच सकती थी।