कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि हर मामले में राजनीति की जाती है। इस पर उन्होंने आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार अब भी अखाड़ों और आश्रमों की समस्याओं के समाधान के लिए गंभीर है। अखाड़ों और आश्रमों को एसटीपी नहीं बनाना होगा। केवल वह बोर्ड को लिखकर दे देंगे कि उनके यहां सीवर लाइन है। बोर्ड में पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण का शुल्क सरकार जमा कराएगी।
केवल आश्वासन से नहीं चलेगा काम
सतपाल ब्रह्मचारी का कहना है कि प्रदेश सरकार ने शहर में एक धेले का काम नहीं किया। केवल केंद्र के बजट से काम हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि बैठक में कैबिनेट मंत्री ने केवल आश्वासन मात्र दिया है। केवल आश्वासन देने से काम नहीं चलेगा। सरकार को शासनादेश जारी करके आश्रमों को हाउस टैक्स और बिजली के व्यावसायिक बिल से मुक्ति देनी चाहिए।
कनखल में कुंभ काम नहीं होने पर संत नाराज
बैठक में कुछ संतों ने इस बात पर नाराजगी जताई कि कनखल में गंगा किनारे कोई नया घाट नहीं बनाया। महामंडलेश्वर स्वामी रामेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि प्रदेश सरकार और कुंभ मेला प्रशासन केवल अखाड़ों के साथ बैठक करता है। आश्रमों के संतों को नहीं बुलाया जाता। उन्होंने कहा कि भविष्य में आश्रमों के संतों केे बुलाया चाहिए।
बैठक में यह संत रहे मौजूद
महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी, कपिल मुनि, स्वामी रूपेंद्र प्रकाश, महंत स्वामी रविदेव शास्त्री, स्वामी हरीहरानंद, स्वामी दिनेश दास, महामंडलेश्वर स्वामी संतोषानंद महाराज, स्वामी प्रेमानंद, महंत जगजीत सिंह, स्वामी श्रवण मुनि, स्वामी गणेशनाथ, महामंडलेश्वर शिवानंद, स्वामी सच्चिदानंद, महंत सत्यव्रता नंद आदि मौजूद रहे।