भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) हरिद्वार भारतीय नौ सेना के लिए अत्याधुनिक सुपर रैपिड गन माउंटिंग (एसआरजीएम) का निर्माण करने जा रहा है। भारतीय नौ सेना की ओर से भेल को दो गन बनाने का ऑर्डर भी मिल गया है। इटली की एलडीएस कंपनी की तकनीकी मदद से गन का निर्माण होगा। भेल में तैयार होने वाली अत्याधुनिक गन की मारक क्षमता मौजूदा गन की तुलना में दोगुनी हो जाएगी। इससे नौ सेना की ताकत बढ़ेगी।
भेल हरिद्वार बीते दो दशकों से भारतीय नौ सेना के लिए सुपर रैपिड गन माउंट 76/62 (एसआरजीएम) बना रहा है। संस्थान नौ सेना को अब तक 44 एसआरजीएम बनाकर दे चुका है। एसआरजीएम नौ सेना के युद्ध पोत का सबसे कारगर हथियार है। वर्तमान में गन की मारक क्षमता करीब 16 किमी तक है। समय के साथ गन की तकनीक को लगातार अपग्रेड किया जा रहा है।
दुनियाभर की नौ सेनाओं की तरह भारतीय नौसेना भी अपनी ताकत बढ़ा रही है। सेना ने अत्याधुनिक गन बनाने के लिए भेल पर भरोसा जताया है। भेल हरिद्वार में मेक इन इंडिया के अंतर्गत अत्याधुनिक गन का निर्माण होना है।
बीएचईएल के पावर एचआर अनिल कपूर के दावे के मुताबिक भारतीय नौ सेना से अत्याधुनिक दो सुपर रैपिड गन माउंटिंग बनाने का ऑर्डर मिल चुका है। जल्द ही सात गन बनाने का ऑर्डर मिलना है। आगामी पांच सालों में ही 55 गन का ऑर्डर मिलने की उम्मीद भी है।
अनिल कपूर ने बताया कि अत्याधुनिक गन निर्माण में तकनीकी उत्कृष्टता के लिए इटली की कंपनी मैसर्स एलडीएस से भेल ने समझौता भी किया है। कंपनी को 30 एमएम नेवल वीपंस स्टेशन (एनएसजी) की आपूर्ति के लिए भी नामित किया गया है। अनिल कपूर का दावा है कि आधुनिक तकनीक से गन की मारक क्षमता दोगुनी हो जाएगी। यह वोल्केनो और डार्ट जैसे गोला बारूद को दागने में भी सक्षम होगी।