उत्तराखंड में दूसरी बार हुई डीएम पर कार्रवाई
राज्य गठन के बाद पहली बार पटवारी की भर्ती होनी थी। साल 2002 के अंत में नारायण दत्त तिवारी सरकार ने इस भर्ती को करवाने का निर्णय लिया था। उस वक्त उत्तराखंड सरकार में राजस्व मंत्री हरक सिंह रावत थे। यह भर्ती पौड़ी के तत्कालीन सीडीओ कुंवर राज कुमार और तत्कालीन जिलाधिकारी एसके लाम्बा की निगरानी में हो रही थी। ऐसे में अनियमितता पाए जाने के बाद डीएम को पहले सस्पेंड किया गया और बाद में उनकी बर्खास्तगी हो गई थी।
पहली जिम्मेदारी में ही दामन पर लगा बदनुमा दाग
सरकार ने जिन दो आईएएस को पहली बार फील्ड में बड़ी जिम्मेदारी दी, उनके दामन में बदनुमा दाग लग गया। आईएएस कर्मेन्द्र को बतौर डीएम और आईएएस वरुण चौधरी को बतौर नगर आयुक्त पहली बार बड़ी जिम्मेदारी मिली थीं। 2011 बैच के आईएएस कर्मेन्द्र वर्ष 2020 में यूपी से उत्तराखंड आए थे। शांत स्वभाव के कर्मेन्द्र इससे पहले लंबे समय तक उत्तराखंड लोक सेवा आयोग में बतौर सचिव तैनात थे। फिर वर्ष 2022 में अपर सचिव कार्मिक की जिम्मेदारी भी संभाली। बतौर डीएम उनकी पहली और उत्तराखंड में उनकी तीसरी तैनाती थी। मूलरूप से गोरखपुर निवासी कर्मेन्द्र को सरकार ने पहली ही बार में बड़े हरिद्वार जिले की जिम्मेदारी सौंपी थीं।
वहीं, 2017 बैच के आईएएस वरुण चौधरी वर्ष 2023 में सिटी मजिस्ट्रेट हरिद्वार और फिर एसडीएम ऋषिकेश के पद पर सेवाएं दे चुके हैं। इससे पहले वे मुख्य विकास अधिकारी पिथौरागढ़ व चमोली में भी रहे हैं। वरुण के बतौर नगर आयुक्त नगर निगम हरिद्वार के कार्यकाल में ही यह जमीन खरीदी गई थी। वे दिल्ली निवासी हैं। उधर, एसडीएम अजयवीर सिंह 2017 बैच के पीसीएस अफसर हैं। वे इससे पहले एसडीएम श्रीनगर, कीर्तिनगर के पद पर सेवाएं दे चुके हैं। हरिद्वार एसडीएम के पद पर रहते हुए घोटाला हुआ।