2022 में लिखी गई भूमि खरीद की पूरी पटकथा
वर्ष 2022 में तत्कालिन जिलाधिकारी विनय शंकर पांडेय के कार्यकाल में लिख दी गई थी भूमि खरीद की पूरी पटकथा
सितंबर 2024
-हरिद्वार नगर निगम ने सराय गांव में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (कूड़ा निस्तारण) परियोजना के लिए करीब 2.307 हेक्टेयर भूमि खरीदने की प्रक्रिया शुरू की।
-भूमि डंपिंग यार्ड के पास स्थित थी और कृषि भूमि से व्यावसायिक उपयोग में परिवर्तन की प्रक्रिया भी हुई।
अक्टूबर-नवंबर 2024
-भूमि की कीमत तय की गई और नगर निगम ने लगभग 54 करोड़ रुपये में खरीद का सौदा किया।
-बाद में आरोप लगे कि भूमि की वास्तविक बाजार कीमत इससे काफी कम थी और भूमि परियोजना के लिए उपयुक्त भी नहीं थी।
दिसंबर 2024 – अप्रैल 2025
-खरीद प्रक्रिया, मूल्यांकन और अनुमोदन को लेकर शिकायतें सामने आने लगीं।
- राजस्व और नगर निगम के अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे।
29 मई 2025
-शासन को प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी गई।
-रिपोर्ट में भूमि खरीद में गंभीर अनियमितताओं और नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई।
3 जून 2025
-मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो आईएएस अधिकारियों सहित 10 अधिकारियों को निलंबित किया।
-विजिलेंस जांच के आदेश दिए गए।
-भूमि की रजिस्ट्री निरस्त करने और भुगतान की वसूली की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए गए।
5 जून 2025
-हरिद्वार नगर निगम ने विवादित भूमि की रजिस्ट्री रद्द कराने के लिए अदालत जाने का निर्णय लिया।
-नए जिलाधिकारी की मौजूदगी में कानूनी राय ली गई।
11 जून 2025
-विजिलेंस टीम हरिद्वार पहुंची।
-विवादित भूमि का निरीक्षण किया गया और संबंधित अधिकारियों के बयान दर्ज किए गए।
जून 2025 से जून 2026
- विजिलेंस की विस्तृत जांच चली।
-कई अधिकारियों के बैंक रिकॉर्ड, फाइल नोटिंग, मूल्यांकन रिपोर्ट और अनुमोदन प्रक्रिया की जांच हुई।
19 जून 2026
-विजिलेंस जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद धामी सरकार ने सख्त कार्रवाई की।
-तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी को सेवा से बर्खास्त करने की संस्तुति की गई।
-तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह के खिलाफ मेजर पेनाल्टी की सिफारिश की गई।
-न्य अधिकारियों के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए गए।
मुख्य आरोप
-डंपिंग यार्ड के पास स्थित अनुपयुक्त भूमि की खरीद।
-बाजार मूल्य से अधिक कीमत पर सौदा।
-भूमि उपयोग परिवर्तन और मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित अनियमितताएं।
-सरकारी धन को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने का आरोप।
किस आईएएस की क्या भूमिका रही
वरुण चौधरी (तत्कालीन नगर आयुक्त, हरिद्वार नगर निगम)
-नगर निगम की ओर से भूमि खरीद प्रक्रिया के प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी थे।
-भूमि चयन, मूल्य निर्धारण संबंधी प्रस्तावों को आगे बढ़ाने और खरीद प्रक्रिया को अंतिम रूप देने में उनकी भूमिका बताई गई है।
-सरकार ने उनके खिलाफ सबसे कठोर कार्रवाई करते हुए सेवा से बर्खास्तगी की संस्तुति की है।
कर्मेंद्र सिंह (तत्कालीन जिलाधिकारी, हरिद्वार)
-जिलाधिकारी के रूप में भूमि खरीद से जुड़े राजस्व और प्रशासनिक अनुमोदनों की निगरानी उनके अधिकार क्षेत्र में थी।
- जांच में उनकी भूमिका को लेकर सरकार ने मेजर पेनाल्टी (गंभीर दंड) की सिफारिश की है।
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-सबसे पहले भूमि का प्रस्ताव तैयार हुआ।
-राजस्व विभाग ने मूल्यांकन और रिपोर्ट तैयार की।
-नगर निगम ने भूमि खरीद का प्रस्ताव आगे बढ़ाया।
-इसके बाद फाइल नगर आयुक्त स्तर पर पहुंची।
-जिलाधिकारी स्तर पर भी अनुमोदन और प्रशासनिक प्रक्रिया हुई।
-अंत में भुगतान और रजिस्ट्री संपन्न हुई।
जांच एजेंसियों का मुख्य आरोप यह है कि जिस भूमि को खरीदा गया वह डंपिंग यार्ड के समीप और अनुपयुक्त थी, फिर भी उसे लगभग 54 करोड़ रुपये में खरीदा गया। यही से नगर निगम और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका जांच के घेरे में आई।