कुशावर्त घाट और होल्कर बाड़े के अवैध खरीद फरोख्त के मामले में दिए गए इंदौर हाईकोर्ट के आदेश की कॉपी हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) को अब तक तक नहीं मिली है। प्राधिकरण के सचिव हरबीर सिंह का कहना है कि आदेश आने और पढ़ने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि अहिल्याबाई होल्कर इंदौर की शासक रही हैं। आजादी से पहले उन्होंने देशभर में कई जगह मंदिरों का निर्माण कराया था। हरिद्वार में भी कुशावर्त घाट और होल्कर बाड़ा उनके समय ही बना था। आजादी के बाद इंदौर को भारत में शामिल कर लिया गया और उसकी संपत्तियां भी सरकार के अधीन आ गई।
अखिल भारतीय होल्कर महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष विजय पाल सिंह का कहना है कि इन संपत्तियों की देखभाल के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने ट्रस्ट बनाए थे। उन्होंने कहा कि हरिद्वार में कुछ ट्रस्टियों ने घाट की जमीन को बेच दिया और एक मंदिर तुड़वाकर यहां दुुकान और होटल बनाए गए।
इस पर उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी। होल्कर की संपत्तियों को लेकर इंदौर हाईकोर्ट में भी कुछ मामले चल रहे थे तो इस मामले को भी वहीं भेजा गया।
विजय पाल सिंह का कहना है कि पांच अक्तूबर को इंदौर हाईकोर्ट ने अवैध खरीद फरोख्त करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने और पूर्व की स्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। वहीं, एचआरडीए के सचिव हरबीर का कहना है कि अभी आदेश नहीं मिला है। कोर्ट के आदेश को पढ़ने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।