बैराज के एसडीओ अनिल कुमार निमेश के मुताबिक अक्टूबर से फरवरी तक गंगा का जलस्तर कम रहता है। बैराज के वाटर एकाउंट असिस्टेंट निर्भय भारद्वाज के मुताबिक वर्तमान में गंगा में सुबह सात हजार क्यूसेक और शाम को 8200 क्यूसेक जलस्तर रिकार्ड हो रहा है।
जबकि दोपहर में जलस्तर 16000 क्यूसेक आ रहा है। सुबह-शाम जलस्तर कम होने से गंग नहर में भी तीन से लेकर पांच हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। पानी डिमांड के हिसाब से छोड़ा जाता है।
निभर्य भारद्वाज बताते हैं, गंगा की मुख्य धारा के पानी का उतार चढ़ाव पूरी तरह मौसम पर निर्भर है। ग्लेशियरों के पिघलने पर ही पानी बढ़ता है। फरवरी तक उतार-चढ़ाव रहेगा और मार्च से गंगा में 30000 क्यूसेक पानी का बहाव शुरू हो जाएगा। 11 मार्च से ही कुंभ के शाही स्नान शुरू हैं।
- गंगा का जलस्तर मौसम पर निर्भर है। जाड़ों में पानी कम हो जाता है और गर्मी में ग्लेशियरों के पिघलने से बढ़ना शुरू होता है। मानसून की बारिश में डेढ़ लाख क्यूसेक तक पहुंच जाता है। - निभर्य भारद्वाज, वाटर एकाउंट अस्टिटेंट, भीमगोड़ा बैराज