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Haridwar Kumbh Mela 2021 : गंगा की धारा में उतार-चढ़ाव, कुंभकाल तक बढ़ेगा बहाव

Mon, 25 Jan 2021 09:26 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal निशांत खनी, अमर उजाला, हरिद्वार
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गंगा की मुख्य जलधारा पर भी पड़ने लगा मौसमी बदलाव का असर - फोटो : AMAR UJALA FILE PHOTO
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मौसमी बदलाव का असर गंगा की मुख्य जलधारा पर भी पड़ने लगा है। उच्चहिमालयी क्षेत्रों में मौसम लगातार करवट बदल रहा रहा है। ग्लेशियरों की बर्फ पिघलने की गति धीमी होने से गंगा की मुख्यधारा में भी उतार-चढ़ाव आ रहा है।

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हरिद्वार बैराज तक गंगा की मुख्य धारा में सुबह-शाम सात से 8200 क्यूसेक पानी पहुंच रहा है। जबकि दोपहर में जलस्तर बढ़कर 16000 क्यूसेक रिकार्ड हो रहा है। मार्च से मौसम खुलने पर ग्लेशियरों के पिघलने से गंगा का बहाव बढ़ेगा और अप्रैल तक करीब 30000 क्यूसेक पहुंच जाएगा।
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हरिद्वार भीमगोड़ा में सिंचाई विभाग का ब्रिटिशकालीन बैराज बना है। हालांकि, पुराने बैराज की जगह 1985 में नया बैराज बन चुका है। बैराज की क्षमता साढ़े छह लाख क्यूसेक पानी को रोकने की है।

बैराज से ही गंगनहर और पूर्वी गंग नहर में सिंचाई और पीने के लिए पानी छोड़ा जाता है। गंग नहर की क्षमता भी 12 हजार क्यूसेक की है। बैराज का जलस्तर बढ़ने पर ही भगीरथी बिंदु से हरकी पैड़ी ब्रह्माकुंड के लिए गंगा की जलधारा पहुंचती है। 

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बैराज के एसडीओ अनिल कुमार निमेश के मुताबिक अक्टूबर से फरवरी तक गंगा का जलस्तर कम रहता है। बैराज के वाटर एकाउंट असिस्टेंट निर्भय भारद्वाज के मुताबिक वर्तमान में गंगा में सुबह सात हजार क्यूसेक और शाम को 8200 क्यूसेक जलस्तर रिकार्ड हो रहा है।

जबकि दोपहर में जलस्तर 16000 क्यूसेक आ रहा है। सुबह-शाम जलस्तर कम होने से गंग नहर में भी तीन से लेकर पांच हजार क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। पानी डिमांड के हिसाब से छोड़ा जाता है।

निभर्य भारद्वाज बताते हैं, गंगा की मुख्य धारा के पानी का उतार चढ़ाव पूरी तरह मौसम पर निर्भर है। ग्लेशियरों के पिघलने पर ही पानी बढ़ता है। फरवरी तक उतार-चढ़ाव रहेगा और मार्च से गंगा में 30000 क्यूसेक पानी का बहाव शुरू हो जाएगा। 11 मार्च से ही कुंभ के शाही स्नान शुरू हैं।

- गंगा का जलस्तर मौसम पर निर्भर है। जाड़ों में पानी कम हो जाता है और गर्मी में ग्लेशियरों के पिघलने से बढ़ना शुरू होता है। मानसून की बारिश में डेढ़ लाख क्यूसेक तक पहुंच जाता है। - निभर्य भारद्वाज, वाटर एकाउंट अस्टिटेंट, भीमगोड़ा बैराज
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