धर्मनगरी को तंबाकू और धूम्रपान से मुक्ति दिलाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमर कस ली है। 15 अगस्त 2020 तक कुंभ क्षेत्र को धूम्रपान से मुक्त क्षेत्र घोषित करने के लिए योजना तैयार की गई है। विभाग का जोर मुख्य रूप से हरकी पैड़ी पर रहेगा।
विश्व की अध्यात्मिक नगरी हरिद्वार में बढ़ती आबादी के साथ ही नशे और तंबाकू का कारोबार भी फलफूल रहा है। होटल, धर्मशाला, आश्रम से गंगा घाटों पर धड़ल्ले से नशे का व्यापार किया जा रहा है। धूम्रपान और तंबाकू के सेवन पर रोक लगाने के लिए कोटपा अधिनियम भी लाया गया था, लेकिन नियम केवल फाइलों तक ही सीमित रह गया। अधिनियम की खुलेआम धज्जियां उड़ाते हुए स्कूलों के पास तंबाकू उत्पाद बेचे जाते हैं।
कलेक्ट्रेट, विकास भवन, तहसील, शिक्षा विभाग, वन विभाग, ऊर्जा निगम, नगर निगम आदि के दफ्तरों में धूम्रपान किया जाता है। हरकी पैड़ी सहित पूरा कुंभ क्षेत्र भी तंबाकू के व्यापार और नशे से अछूता नहीं है, लेकिन धरातल पर नियमों का अनुपालन होता कहीं नहीं दिख रहा। वर्ष 2021 में होने वाले कुंभ को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने कुंभ क्षेत्र को धूम्रपान से मुक्त घोषित करने के लिए योजना बनाई है। जिससे वर्ष 2021 में होने वाले वाले कुंभ में कोई भी व्यक्ति धूम्रपान करता नहीं दिखेगा।
नेशनल तंबाकू कंट्रोल कार्यक्रम (एनटीसीपी) के नोडल अधिकारी डा. अजय शर्मा का कहना कि हरकी पैड़ी एक विश्वविख्यात क्षेत्र है, जहां रोजाना लाखों यात्री आते हैं। इसलिए धूम्रपान से मुक्त घोषित करने के लिए हरकी पैड़ी पर मुख्य जोर रहेगा। इससे पूरे देश में सकारात्मक संदेश जाएगा। हर किसी से सख्ती से नियमों का पालन कराया जाएगा।
ये है कानून
कोटपा अधिनियम की धारा चार के अनुसार सार्वजनिक स्थलों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, अस्पताल, न्यायालय परिसर, शिक्षण संस्थान, कैफे, बैंक और अन्य स्थानों पर धूम्रपान निषेध है। नियम का उल्लंघन करने पर उसे सौ रुपये जुर्माना का प्रावधान है।
जुर्माना लगाने के लिए सब इंस्पेक्टर रैंक का अधिकारी अधिकृत है। अधिनियम की धारा 6 के अंतर्गत सिगरेट और तंबाकू उत्पादन 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों के बिक्री पर प्रतिबंध है। धारा 6 बी के तहत शैक्षणिक संस्थाओं के सौ मीटर की दूरी की दूसरी तक इन पदार्थों की बिक्री प्रतिबंधित है। उल्लंघन करने पर दो हजार के जुर्माना का प्रावधान।