इसके बाद भी कई बार कुंभ को लेकर विवाद पैदा करने की कोशिश की गई। पत्र में कहा गया है कि इस बार फिर ज्योतिष गणना के आधार एक वर्ष पूर्व ही कुंभ 2021 में कराने का प्रयास हो रहा है, लेकिन कोरोना जैसी बाधा आने से यह प्रयास विफल होने लगा है। कोरोना के चलते जो परिस्थितियां बनी हैं, उनके कारण न तो कुंभ की तैयारी पूरी हो सकेगी और न ही श्रद्धालु आएंगे। ऐसे में वर्ष 2021 में तो कुंभ हो ही नहीं सकता।
उन्होंने केंद्र सरकार, सभी राज्य सरकारों, अखाड़ों, धार्मिक सांस्कृतिक, सामाजिक संस्थाओं, सनातन धर्म के सभी अनुयायियों से अपील की है कि सर्वसम्मति से निर्णय लेकर कुंभ 2022 में कराने का निर्णय लें। समिति के महामंत्री स्वामी विश्वात्मानंद पुरी महाराज ने बताया कि समिति से जुड़े सभी संत इस प्रस्ताव से सहमत हैं। कुंभ हमेशा 12 साल के अंतराल पर होना चाहिए।
सोशल मीडिया पर भी चल रही मुहिम
कुंभ मेले का आयोजन वर्ष 2021 के बजाय 2022 में कराने की कवायद को लेकर सोशल मीडिया पर भी मुहिम शुरू कर दी गई है। सामाजिक कार्यकर्ता अमित पंजवानी और उनके साथियों ने ऑनलाइन प्रस्ताव डालकर देशभर से इस मुहिम के लिए समर्थन जुटाना शुरू कर दिया है। उनके प्रयास को लोग समर्थन भी दे रहे हैं। इनका तर्क है कि वैसे भी कुंभ हमेशा 12 साल बाद ही होता है। पिछला कुंभ हरिद्वार में वर्ष 2010 में हुआ था। इसलिए इस बार 2022 में होना चाहिए।
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि महाराज ने समिति की इस मुहिम को औचित्यहीन बताते हुए कहा कि कुंभ के बारे में कोई भी निर्णय लेने का अधिकार केवल अखाड़ा परिषद को है। परिषद ने इस समिति को मान्यता नहीं दी है। उन्होंने कहा कि कुंभ के आयोजन का पौराणिक गणित है, जिसके हिसाब से कुंभ 2021 में ही होगा। अभी बहुत समय है। सरकार भव्य कुंभ के आयोजन की तैयारी करने में सक्षम है।
भाजपा विधायक भी उठा चुके हैं सवाल
हरिद्वार कुंभ के कार्यों को लेकर जिले के भाजपा के दो विधायक सुरेश राठौर और देशराज कर्णवाल भी सवाल उठा चुके हैं। सुरेश राठौर का कहना है कि कोरोना के कारण कुंभ में बहुत कम श्रद्धालु पहुंचेंगे। इसलिए सरकार को और ज्यादा बजट जारी नहीं करना चाहिए, केवल स्थायी काम पूरा करें। विधायक देशराज कर्णवाल ने भी यही मांग उठाई थी।
300 करोड़ जारी कर चुका केंद्र
हरिद्वार में कुंभ के काम करीब दो साल पहले शुरू हुए थे। कुंभ के लिए राज्य सरकार ने करीब 1200 करोड़ रुपये का बजट खर्च करने की योजना बनाई थी। इसमें से केंद्र सरकार 300 करोड़ रुपये दे चुकी है। लॉकडाउन शुरू होने से पहले सभी स्थायी कार्य तेजी से शुरू कर दिए गए थे। लॉकडाउन के कारण करीब दो महीने तक कुंभ के सारे काम रुके रहे। अब जो काम दोबारा शुरू हुए, उसमें अधिकांश स्थायी हैं। कुंभ मेल प्रशासन का भी अभी स्थायी कार्यों पर ही ज्यादा फोकस है।