अब निरंजनी अखाड़े के नागा संन्यासी और अन्य संतों को आचार्य महामंडलेश्वर के रूप में कैलाशानंद गिरि दीक्षा देंगे। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि ने कहा कि ईष्ट देव भगवान कार्तिकेय के बाद अखाड़ों में आचार्य महामंडलेश्वर सबसे बड़े होते हैं। सभी परंपराएं पूरी करने के बाद कैलाशानंद गिरि को दीक्षा दी गई। मौके पर श्रीमहंत राम रतन गिरि, महंत राधेश्याम गिरि, महंत मनीष भारती, महंत नरेश गिरि महाराज, महंत सुखदेव पुरी महाराज, महंत नीलकंठ गिरि, महंत गंगा गिरि, रत्नगिरी महाराज, महंत अनुज पुरी, महंत राजेंद्र भारती मौजूद थे।
विद्वान व्यक्ति में होता है सेवा का भाव : कैलाशानांद
कैलाशानंद गिरि ने कहा कि संन्यास लेने के लिए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि, महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि और श्रीपंचायती निरंजनी अखाड़े के सचिव श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने उन्हें प्रेरणा दी। उन्होंने ही कहा था कि आपको आचार्य महामंडलेश्वर बनना है। उन्होंने कहा कि विद्वान व्यक्ति वही होता है, जिसमें सेवा का भाव हो। कैलाशानंद ने कहा कि वह 45वें वर्ष में प्रवेश कर गए हैं। अग्नि अखाड़े के बाद उनका जीवन श्री पंचायती निरंजनी अखाड़े के लिए रहेगा। जब भी अग्नि अखाड़े को जरूरत होगी, वह हर सेवा के लिए तैयार रहेंगे।