हरिद्वार, सहारनपुर जिले में है। यह बात आपको अजीब लग रही होगी। लेकिन, जिले के लेखपालों के पास उपलब्ध नक्शे में यही है।
इतना ही नहीं इन नक्शों में पहाड़ के कई जिले भी गायब हैं। यह हाल तब है जब प्रदेश को बने 13 साल हो चुके हैं।
वर्षों पुराने नक्शे
आप जब जमीन की रजिस्ट्री करवाने स्थानीय लेखपाल के पास जाते हैं तो नए नक्शे आदि बनाने के लिए आज भी वर्षों पुराने नक्शों की मदद ली जाती है।
उत्तर प्रदेश में हरिद्वार
इनमें हरिद्वार उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले का हिस्सा है। और रुड़की तहसील के अंतर्गत आता है। जबकि 28 दिसंबर 1988 में उत्तरप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने सहारनपुर जिले की रुड़की तहसील को सहारनपुर से अलग कर जिला हरिद्वार के नाम से बनाया था।
हरिद्वार जिले बनने के 12 वर्ष बाद उत्तराखंड का गठन हुआ। राज्य बने 13 साल हो गए हैं। लेकिन, लेखपालों के पास अब तक भी 1960 के नक्शे हैं।
पुराने स्वरूप में जिले
इनमें आज भी उत्तराखंड के विभिन्न जिले अपने पुराने स्वरूप में हैं। रुद्रप्रयाग जिला आज भी चमोली जिले का हिस्सा है, ऊधमसिंह नगर जिला नैनीताल और चंपावत पिथौरागढ़ का हिस्सा है।
जर्जर हुए नक्शे
लेखपालों के पास उपलब्ध नक्शे जर्जर हालात में हैं। यदि स्थानीय नागरिक लेखपाल के पास अपनी जमीन के खसरा नंबर पता करने और अपनी जमीन की लोकेशन जानने जाता है तो फटे नक्शों में लोकेशन नजर ही नहीं आती।
लेखपाल अनुमान लगाकर लोकेशन बता रहे हैं। लेखपालों का कहना है कई बार वरिष्ठ अधिकारियों को इससे अवगत कराया लेकिन कुछ नहीं हो रहा है।
यह हो रही दिक्कत
- फटे- पुराने नक्शे जमीन की लोकेशन नजर ही नहीं आती।
- जमीन के विवाद में नक्शे से सहायता नहीं मिल पाती।
- जिले की सीमाओं का पता नहीं चलता।
- नए आवासीय और औद्योगिक क्षेत्र दर्ज नहीं हो पाए।
इनकी भी सुनिए...
वर्ष 1960 में भू-पैमाइश हुई थी। हरिद्वार जिला पूर्व में सहारनपुर जिले का हिस्सा था। इसलिए लेखपालों के पास उपलब्ध नक्शे में सहारनपुर का नाम होगा यह लाजिमी है। जहां तक नक्शों के डैमेज होने की बात है तो उच्चाधिकारियों से इस संदर्भ में बात की जाएगी।
- मस्तराम भट्ट प्रशासनिक अधिकारी, भू-आलेख अनुभाग कलेक्ट्रेट हरिद्वार