हरिद्वार में हरकी पैड़ी पर पिछले करीब 16 वर्षों से अधर में लटके गंगा मंदिर के जीर्णोद्धार का रास्ता साफ हो गया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने नैनीताल उच्च न्यायालय का वह फैसला खारिज कर दिया, जिसके अधीन गंगा के बीचों-बीच बने गंगा मंदिर को एक वर्ष पहले सरकारी नियंत्रण में ले लिया गया था। सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से मंदिर का स्वामित्व अब पुन: बुधकर परिवार के पास आ गया है।
नैनीताल उच्च न्यायालय ने 26 नवंबर 2013 को आदेश पारित कर मंदिर प्रबंध के लिए तीन सदस्यीय बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज गठित किया था। तब इस बोर्ड ने मंदिर का प्रबंधन बुधकर परिवार से वापस ले लिया था। नैनीताल उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ डा. कमलकांत बुधकार सुप्रीम कोर्ट गए।