लंबे समय तक कोई साक्ष्य न मिलने के कारण यह केस अनसुलझा रह गया है। 25 अक्टूबर को इस प्रकरण को 868 दिन पूरे हो गए। दो साल से अधिक समय बीत जाने के बाद अब पुलिस रिकॉर्ड में यह केस एक ब्लाइंड मर्डर मिस्ट्री बनकर रह गया है। एक पुलिस अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लगाए जाने की पुष्टि की है। विभाग ने कहा है कि अब आगे कोई ठोस सुराग मिलने पर ही केस को दोबारा खोला जाएगा।
साक्ष्य मिलने पर दोबारा वहीं से शुरू होगी जांच
पुलिस महकमे में सेवाएं दे चुके सेवानिवृत्त अधिकारी बताते हैं कि ऐसे केस बंद नहीं होते हैं। ये अलग विषय है कि जांच जहां तक पहुंची वहीं पर उसमें समय-सीमा को देखते क्लोज करते हुए रिपोर्ट लगा दी जाती है लेकिन अगर किसी भी हालत में उस केस से जुड़ा कोई साक्ष्य मिलता है तो जांच फिर से वहीं से शुरू होती है जहां से क्लोज की जाती है। कई बार आवश्यकता पड़ने पर तत्कालीन विवेचक को भी उस प्रकरण में शामिल किया जाता है।