अधिकारियों ने किया था एडवांस टेक्नोलॉजी का दावा
नए घाटों के निर्माण में अनदेखी का हाल यह है कि इसको लेकर निर्माण शुरू होते ही सवाल उठे थे। बावजूद इसके अधिकारियों ने करोड़ों रुपये खर्च में एडवांस टेक्नोलॉजी का प्रयोग करने का दावा किया था। अधिशासी अभियंता सिंचाई का दावा था कि नहर खुलने के बाद किसी प्रकार की समस्या नहीं होगी। आखिरकार वही हुआ जिसे स्वयं विभागीय जिम्मेदारों का भय था। बताया जा रहा है कि निर्माण पूरा नहीं होने की स्थिति में सिंचाई विभाग उत्तराखंड ने उत्तर प्रदेश को पत्र लिखकर घाट निर्माण के लिए अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया था। इस अनुरोध को उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने आपत्ति के साथ लौटा दिया था।
फाउंडेशन टूटने की सूचना पर पहुंचीं मेला अधिकारी
नवनिर्मित घाट के फाउंडेशन के बहने और जगह-जगह दरकने की सूचना मिलते ही मौके पर मेलाअधिकारी सोनिका भी अपर मेला अधिकारी दयानंद सरस्वती के साथ पहुंचीं। उन्होंने नवनिर्मित घाट का जायजा लिया। अधिशासी अभियंता सिंचाई ओमजी गुप्ता का कहना है कि जिस जगह से सीमेंट, कंकरीट बहा है वह उसी दिन पूर्ण किया जिस रात में गंगनहर को चालू किया गया। उनका दावा है कि जिन जगहों पर घाट दरके हैं और समस्या आई है उसे जल्द ही दुरुस्त कर लिया जाएगा। फिलहाल, मेला अधिकारी ने इस संबंध में अभी तक कार्यदायी संस्था से कोई सवाल जवाब नहीं किया है। मेला प्रशासन का कहना है कि थर्ड पार्टी को मौके पर बुलाकर सैंपलिंग करा ली गई है।
घाट निर्माण की शुरुआत नहर की वार्षिक बंदी में की गई। फर्म को एक भी रुपया भुगतान नहीं किया गया है। जहां भी क्षति हुई है उसके समेत थर्ड पार्टी क्वालिटी जांच करने वाली संस्था की रिपोर्ट आने और सुधारीकरण के बाद ही भुगतान पर विचार किया जाएगा। इस पूरे मामले की गहनता से जांच की जाएगी। रविवार का अवकाश है बावजूद इसके मातहतों को निर्देशित कर दिया गया है कि विशेषज्ञों के साथ वह मौके पर पहुंचे। मैं स्वयं निरीक्षण के दौरान मौजूद रहूंगा। जहां भी कमी होगी ठेकेदार को नोटिस दिया जाएगा।
-ओमजी गुप्ता, अधिशासी अभियंता सिचाई विभाग उत्तराखंड