हरिद्वार में गुरुकुल कांगड़ी सम विश्वविद्यालय के 118 साल पुराने पुस्तकालय को ऑनलाइन कर दिया गया है। गुरुकुल के इस पुस्तकालय में छह हजार रिसर्च जर्नल के साथ ही करीब 15 लाख पुस्तकों का संग्रह है। विश्वविद्यालय के पुस्तकालय को ऑनलाइन करने से शोध व छात्रों को इसका बड़ा लाभ होगा।
गुरुकुल कांगड़ी सम विश्वविद्यालय के संस्थापक स्वामी श्रद्धानंद महाराज ने 1902 में कांगड़ी गांव गुरुकुल की स्थापना की थी। इस समय गुरुकुल एक पुस्तकालय भी स्थापित किया था। तभी से इस पुस्तकालय में लगातार दुर्लभ ग्रंथों, वेदों, पांडुलिपियों और छात्रों के पढ़ाने के लिए पुस्तकों की संख्या लगातार बढ़ती ही जा रही है।
विश्वविद्यालय के कुल सचिव प्रोफेसर दिनेश भट्ट ने बताया कि विश्वविद्यालय के शोध छात्रों के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की गाइडलाइन के अनुसार करीब छह हजार रिसर्च जनरल को ऑनलाइन कर दिया गया है। इसके साथ ही चारों वेदों के भाष्य तथा अन्य ग्रंथों को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया जारी है। विश्वविद्यालय के पुस्तकालय में करीब 15 लाख पुस्तकों संग्रहित हैं।
इन पुस्तकों को ऑनलाइन करने का कार्य भी किया जा रहा है। शुक्रवार को कुल सचिव प्रो. दिनेश भट्ट, पुस्तकालय इंचार्ज प्रो. श्रवण कुमार शर्मा, कार्यवाहक पुस्तकालय अध्यक्ष डॉ. अनिल दीवान आदि की उपस्थिति में पुस्तकालय को ऑनलाइन कर दिया गया। अब छात्र एक कोड की मदद से विश्वविद्यालय के पुस्तकालय से ऑनलाइन जुड़ सकेंगे।
गुरुकुल कांगड़ी सम विश्वविद्यालय के पुस्तक में अति प्राचीन दुर्लभ पुस्तकों का भंडार है। इसके प्राचीन महत्व को देखते हुए इसे ऑनलाइन किए जाने का कार्य किया गया है। विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं अब इसका पूरा लाभ ले सकेंगे।
- प्रो. रूप किशोर शास्त्री, कुलपति गुरुकुल कांगड़ी विवि