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हरेला पर सीएम ने पौधा रोपकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश, प्रदेश में लगाए जाएंगे 6.25 लाख पौधे 

Wed, 17 Jul 2019 08:51 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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रहेला - फोटो : अमर उजाला
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि रिस्पना से ऋषिपर्णा का सपना जल्द पूरा होगा। रिस्पना जलागम क्षेत्र के 11 जगहों पर 31 हजार पौधे रोपने का अभियान चल रहा है। पिछले वर्ष भी रिस्पना और कोसी नदी को पुनर्जीवित करने के लिए बड़े स्तर पर पौधे लगाए गए थे। 

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मुख्यमंत्री मंगलवार को रिस्पना से ऋषिपर्णा अभियान के तहत मोथरोवाला में पौधरोपण कार्यक्रम के दौरान लोगों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ज्यादातर पौधे पीपल, बरगद आदि के लगाए जा रहे हैं। इस दौरान उन्होंने हरेला और गुरु पूर्णिमा की बधाई दी। कहा कि हरेला सुख-समृद्धि व जागरूकता का प्रतीक है। वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड जैव विविधता वाला राज्य है।

भारत की कुल जैव विविधता में 28 प्रतिशत योगदान उत्तराखंड का है। ईकोलॉजी को बचाने की उत्तराखंड पर बड़ी जिम्मेदारी है। हरेला पर्व पर पिछले वर्ष पर 4.50 लाख पौधे लगाए गए थे। इस साल प्रदेशभर में 6.25 लाख पौधे लगाए जाएंगे। इस अवसर पर मेयर सुनील उनियाल गामा, विधायक विनोद चमोली, भरत चौधरी, भाजपा महानगर अध्यक्ष विनय गोयल, प्रमुख वन संरक्षक जयराज, सचिव अरविंद सिंह ह्यांकी, जिलाधिकारी सी. रविशंकर, अपर सचिव डॉ. मेहरबान सिंह बिष्ट आदि मौजूद रहे। 

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एक पेड़ नहीं, पूरा जंगल पनपाओ

हरेला सहित अन्य मौकों पर रोपे जा रहे पौधों की जीवित रहने की दर को बढ़ाने के लिए अब एक साथ और एक ही तरह के क्षेत्र में अधिक से अधिक पौधों को रोपने की योजना बनाई गई है। इस प्रयोग के तहत इस बार हरेला पर्व पर अल्मोड़ा में कोसी नदी के जल संग्रहण क्षेत्र में करीब दो लाख पौधे रोपे जाएंगे। वन विभाग की कोशिश इस तरह के अभियान अन्य क्षेत्रों में शुरू करने की भी है। 

2016 के बाद से कुमाऊं के सांस्कृतिक हरेला पर्व को प्रदेश में एक व्यापक स्तर के पौधरोपण अभियान का रूप दिया जा चुका है। लोगों ने भी इस पहल को हाथों-हाथ लिया और अब हरेला एक तरह से प्रदेश में सामाजिक स्तर पर व्यापक पौधारोपण अभियान का पर्याय बन गया है। मुसीबत ये है कि व्यापक स्तर पर पौधारोपण होने के बावजूद प्रदेश को इसका फायदा बेहद कम मिल रहा है।

कारण ये है कि रोपे गए पौधों की मृत्यु दर अधिक है। यह प्रदेश सरकार के लिए भी चिंता का सबब है और यही वजह है कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी लोगों से लगाए गए पौधों की देखभाल का दायित्व स्वीकार करने की अपील कर रहे हैं। 
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कोई ठोस जानकारी नहीं
लोगों की ओर से रोपे जा रहे पौधों के जीवित रहने की दर को जानने के लिए अभी तक कोई अध्ययन भी नहीं किया गया है। वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक कुल मिला कर यह तय है कि लोगों की ओर से रोपे जा रहे पौंधों का सरवाइवल रेट बहुत ही कम है। 

पिछले साल लगाए थे डेढ़ लाख पौधे, 90 से अधिक मिला सरवाइवल रेट
कोसी नदी के जल संग्रहण क्षेत्र में पिछले साल ही वन विभाग ने डेढ़ लाख पौध रोपीं थी। इनका रोपण भी नदी को पुनर्जीवित करने के अभियान के तहत किया गया था। वन विभाग ने पाया कि इन पौधों का सरवाइवल रेट 90 प्रतिशत से अधिक रहा। यहीं से एक क्षेत्र में अधिक से अधिक पौधे लगाने की योजना ने जन्म लिया। 
 
क्यों नहीं बचते पौधे
- पौधों का सही चयन का न होना, मसलन अधिक पानी की दरकार वाले पौधों को कम पानी वाले क्षेत्रों में लगा देना
- ट्री गार्ड आदि की व्यवस्था न करना, ऐसे में लगाए गए पौधे को जानवर नुकसान पहुंचा देेते हैं
- रोपे गए पौधों की देखभाल न होना, समय पर पानी, मिट्टी आदि की जरूरत की अनदेखी
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