ऋषिकुल आयुर्वेदिक परिसर में निलंबित दो दागी छात्रों का कुलपति के आदेश पर एडमिशन कराने के मामले का आयुष मंत्री ने संज्ञान लिया है।
कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत ने कहा है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच होगी। उन्होंने कहा कि यदि उनका बेटा भी दोषी होता तो वे दाखिले के लिए सिफारिश नहीं करते। मामले में दोषी किसी भी अधिकारी और कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा।
ऋषिकुल आयुर्वेदिक परिसर में यूएपीएमटी के माध्यम से चिटिंग कर दो छात्रों के प्रवेश लेने के मामले में अमर उजाला के खुलासे का राज्य के आयुष मंत्री हरक सिंह रावत ने संज्ञान लिया है। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा है कि ऋषिकुल आयुर्वेदिक परिसर का यह प्रकरण बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने ऐसे सभी आरोपियों पर कार्रवाई न होने पर भी नाराजगी जताई। भाजपा नेता एवं पूर्व राज्यमंत्री विनोद आर्य के पुत्र एबीवीपी कार्यकर्ता पुलकित आर्य और दीदार सिंह के प्रवेश का जिक्र करने पर उन्होंने कहा कि ‘यदि मेरा बेटा भी ऐसे किसी प्रकरण में शामिल रहा होता तो मैं कतई एडमिशन नहीं कराता’। पूरे मामले की की निष्पक्ष तरीके से जांच कराई जाएगी। दोष सिद्घ होने पर कुलपति, रजिस्ट्रार हो या निदेशक, सभी पर कार्रवाई होगी। वहीं दूसरी ओर शासन ने इस मामले से पल्ला झाड़ने का प्रयास किया है।
विश्वविद्यालय अपने आप में स्वायत्तशासी संस्था है। उनके प्रवेश संबंधी मामलों में शासन का कोई हस्तक्षेप नहीं होता। ये पूरा मामला विश्वविद्यालय स्तर का ही है और जहां पूर्व कुलसचिव की शिकायत की बात है, वह शिकायत शासन तक नहीं पहुंची है, शिकायत मिलने पर उसका परीक्षण कराया जाएगा।
- हरबंस सिंह चुघ, आयुष प्रभारी सचिव