कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत व अन्य कांग्रेसियों पर मुकदमा समाप्ति के प्रार्थनापत्र पर न्यायालय ने सरकार को सुनवाई का मौका दिया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट एमएम पांडेय की अदालत ने सुनवाई के लिए आगामी 16 अगस्त की तिथि नियत की है।
बता दें कि हरक सिंह रावत व अन्य के खिलाफ चल रहे इस मुकदमे को वापस लेने के लिए एक बार पूर्व की कांग्रेस सरकार ने भी प्रार्थनापत्र दिया था। विगत 28 नवंबर 2014 को न्यायालय ने यह प्रार्थनापत्र खारिज कर दिया था। उस वक्त न्यायालय ने कहा था कि सरकार ने मुकदमा वापसी को लोकहित की दलील दी है, मगर इसमें कोई लोकहित नजर नहीं आता है। इससे समाज में गलत संदेश जाएगा।
गौरतलब है कि अब भाजपा सरकार की ओर से भी मुकदमा वापसी को प्रार्थनापत्र दिया था। इसके लिए संशय यह भी है कि क्या न्यायालय एक ही मुकदमे में दूसरी बार सीआरपीसी की धारा 231 के प्रार्थनापत्र का संज्ञान ले सकता है। अब मंगलवार को न्यायालय ने उच्च न्यायालय नैनीताल के एक निर्णय को दृष्टिगत रखते हुए द्वितीय प्रार्थनापत्र पर सरकार को सुनवाई का मौका दिया है।
ये है मामला
घटना 21 दिसंबर 2009 की है। घटनाक्रम के अनुसार तत्कालीन नेता प्रतिपक्ष ने भाजपा सरकार के खिलाफ अपने समर्थक नेताओं के साथ विधानसभा का घेराव के लिए कूच किया था। इस दौरान पुलिस ने उन्हें रोका तो नेताओं की पुलिस के साथ धक्कामुक्की और मारपीट हो गई। इस मामले में पुलिस ने हरक सिंह रावत, प्रदीप टम्टा, सुबोध उनियाल, यशपाल आर्य, प्रीतम सिंह आदि के विरूद्ध मारपीट व बलवा की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था।