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...फिर सुर्खियों में उत्तराखंड का ये 'गर्लफ्रेंड मैन'

Wed, 03 Aug 2016 04:18 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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हरक सिंह रावत - फोटो : AmarUjala
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कांग्रेस में सियासी भूचाल लाने के अहम किरदार हरक सिंह रावत एक बार फिर सुर्खियों में हैं। पर इस बार मामला दूसरा है। इस बार हरक पर महिला से बलात्कार करने का आरोप लगा है। दिल्ली के सफदरजंग थाने में मामला दर्ज है और महिला अपना बयान मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज करा चुकी है। लेकिन यह पहली बार नहीं है जब हरक सिंह रावत महिलाओं से संबंधों या यौन उत्पीड़न के मामले में चर्चा में आयें हों।
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एक मामले में तो हरक को सीबीआई जांच और डीएनए टेस्ट तक से गुजरना पड़ा था। हालांकि हरक पर आरोप साबित नहीं हो पाये और वह बरी हो गये। लेकिन जब-तब हरक सिंह और उनकी महिला मित्रों को लेकर चर्चायें उठती रहीं।

जैनी प्रकरण से लेकर कई महिला मित्रों से उनके नाम जुड़े। हरक के विरोधी उन्हें गर्लफ्रेंड मैन कहकर बुलाते हैं। कुछ दिन पहले ही हरक सिंह रावत से अमर उजाला संवाददाता ने बात की तो उनसे इन संबंधों पर भी सवाल पूछे गए। आज पढ़िए हरक सिंह रावत का वो इंटरव्यू...
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'जीतने के लिए जो कुछ कर सकता था किया'

हरक सिंह रावत - फोटो : RajivGupta/AmarUjala
हरीश रावत से ऐसे क्या मतभेद थे, जो आप उन्हें पैदल करने में जुट गए?

हरीश रावत कई बार सांसद रह चुके। केंद्रीय मंत्री रह चुके। सीएम रह चुके। प्रधान मंत्री के अलावा कोई पद नहीं जिस पर वे न रहे हों, लेकिन लेकिन वे हर उस आदमी से डरते हैं, जिनका कद कल उनको चुनौती दे सकता है।  हरीश रावत, किसी का भी विश्वास नहीं करता। जो मुख्यमंत्री अपने सलाहकारों, ओएसडी के भरोसे सरकार चलाए, उसकी सरकार कभी जनहित के निर्णय नहीं लेगी।  आप प्रीतम सिंह-यशपाल  से अकेले में मिलो उनका दर्द पता चल जाएगा, इंदिरा हृदयेश क्या खुश हैं? कुछ लोग दबकर रह जाते हैं, मैं ऐसा नहीं हूं। यह सिद्धान्त की लड़ाई थी, जीतने के लिए जो कुछ कर सकता था किया। 

स्टिंग भी? तमाम लोगों का मानना है कि इसके पीछे सारा खेल आपका था। इससे तो उल्टे आप भी फंस गए?

सीबीआई ने मुझे बुलाया था उनको मैंने बता दिया है कि यह मैने नहीं किया न मेरी प्लानिंग थी। चैनल संचालक ने सीएम से टेलीफोन पर बात करते हुए मुझे कान्फ्रेंस में लिया। उसने कहा कि इनसे बात कर लो। मैंने बात की। मेरे दिमाग में था ही नहीं कि बात किसलिये हो रही है। उसके बाद सीएम, चैनल संचालक से मिले। उसके बाद फिर संचालक का फोन मुझे आया कि हरीश रावत बात करेंगे। हरीश रावत ने कहा कि आप तो सस्ते में मान गए। दूसरा स्टिंग भी उसी चैनल के लोगों ने गोपनीय ढंग से किया उनका संवाददाता मेरे घर पर आया था इसी बीच मदन बिष्ट आ गए। उसने कब हमारी बात रिकार्ड कर ली मुझे पता भी नहीं।

आपको क्या लगता था आप सीएम बन जाएंगे?

हरक सिंह रावत - फोटो : ANI
18 मार्च को सदन में जो आपने किया, उससे क्या आपको ऐसा लग रहा था कि आप हरीश रावत का तख्ता पलट कर मुख्यमंत्री बन जाएंगे?

मैंने यह फैसला सीएम बनने के लिए नहीं लिया था। कांग्रेस में जिस तरह हमारी अनदेखी हो रही थी। मुझे और विजय बहुगुणा को कोर कमेटी से बाहर किया गया। न तो हरीश रावत और न ही दिल्ली वाले हमारी सुन रहे थे। ऐसे में हमें लगा कि कांग्रेस को हमारी जरूरत नहीं है। हमने पूरी प्लानिंग की थी जो काफी हद तक कामयाब रही। सदन में उस दिन विनियोग विधेयक पर साबित कर दिया कि हरीश रावत की सरकार अल्पमत में है।

आप कहते रहिए अल्पमत में, सरकार तो अब भी हरीश रावत की है ? 

देखिये, हमारा सोचना यह था कि विधानसभा अध्यक्ष काले को सफेद और सफेद को काला तो बता नहीं देंगे। कुंजवाल को कुछ तो शर्म-लिहाज होगी। सदन में 67 में से 35 विधायक हमारे साथ थे। सही मायने में सरकार तो गिर गई थी, लेकिन हरीश और विधानसभा अध्यक्ष ने साजिश कर विधेयक को पास किया। बेसिकली हमसे चूक नहीं हुई।

हमको लग रहा था कि गोविंद कुंजवाल इतना तो गलत नहीं करेगें। दूसरा, राज्यपाल को वीडियो रिकॉर्डिंग देख कर निर्णय लेना चाहिए था। खैर उन्होंने जो 28 मार्च तक का समय सरकार को दिया उसमें धांधली से अध्यक्ष ने विनियोग विधेयक को पास मान लिया और हमारा निष्कासन कर दिया। इतना समय नहीं दिया जाना चाहिए था। यहां जिनको संविधान की रक्षा करनी चाहिए थी उनके स्तर से चूक हो गई। गोविंद कुंजवाल की दया और दस दिनों के कारण यह सरकार बची। चुनाव आने दीजिए, रावत को उनकी असली जगह दिखा दूंगा।

...जो हरक सिंह रावत किया वह क्या है?

हरक सिंह रावत - फोटो : AmarUjala
आप कहते हैं कि हरीश रावत बदले की भावना से काम कर रहै हैं तो जो आपने किया वह क्या है?

हरीश रावत  मेरे करीबियों को पदों से हटाकर, उपनल से नौकरी समाप्त कर और मेरे खिलाफ जांच बैठा कर जो कर रहे हैं वह मुख्यमंत्री का काम नहीं है। मुझे भी पता है कि वीरेंद्र रावत की मिसेज का खटीमा में डिग्री कालेज है, उसमें खामियां है। सीएम के बच्चों के नाम पर, दिल्ली में पेट्रोल पंप हैं, केंद्र  सरकार से बोल कर सैंपल भरवाकर बंद करवा सकता हूं। लेकिन मैं इस तरह की राजनीति पर विश्वास नहीं करता। हरीश रावत को हम विधायकों की खरीद-फरोख्त, खनन और एफएल-2, स्टिंग प्रकरण पर घेरेंगे। 

एक आरोप हमेशा आप पर लगता है कि आप जब सत्ता में आते हैं तो आपके करीबी बड़ी कुर्सियों पर बैठ जाते हैं?

मुझे एक बात बताओ अगर कोई व्यक्ति मेरा चुनाव के समय में साथ देता है तो क्या में सत्ता में आने के बाद उसे भूल जाऊं। उस पर जितनी अखबार बाजी करो मैं पीछे नहीं हटता। कोई भी अखबार लिखता रहे, मैंने बड़सार विवि में अपने बहनोई को लगाया तो लगाया। मैंने उनका कर्ज चुकता कर दिया। अब हरीश रावत हटा रहा है तो हटा दे।

लोग हरक सिंह को गर्लफ्रेंड मैन भी कहते हैं?

हरक सिंह रावत - फोटो : AmarUjala
किसी भी व्यक्ति की छवि खराब करने के लिए सबसे आसान तरीका महिला से उसका नाम जोड़ दो। जैनी प्रकरण में मेरा नाम जोड़ा, लेकिन अभी तक मेरी कोई संलिप्तता नहीं पाई गई। मैंने बीएस नेगी को उद्यान विभाग का डायरेक्टर बनाया, 7600 के ग्रेड पे पर। किसी ने नहीं पूछा न लिखा कि विधिवत है या नहीं। उधर, दमयंती रावत को तराई बीज विकास निगम की निदेशक बनाया तो हंगामा मच गया। मैंने चार लड़कियां कहीं नौकरी पर रखवाई तो आरोप लग गया कि मेरे रिश्ते हैं, लेकिन मैंने जो दूसरे लोगों को नौकरी या पद दिए उनके बारे में बात नहीं होती। यह सब साजिश है कि हरक को बदनाम करो। 

तो भाजपा क्या आपको सीएम बना देगी?

मैंने इसके लिए यह सब किया भी नहीं। मेरे मन में यह वर्ष 2012 में जरूर था। 2007 से बतौर नेता प्रतिपक्ष सरकार को सदन में जो घेराबंदी की। विपरीत परिस्थितियों में नई जगह रुद्रप्रयाग में जाकर जीत हासिल की। कई विधानसभाओं में जीत दिलवाई। उस समय मुझे लगा कि पार्टी मुझे मौका देगी। जब बहुगुणा सीएम घोषित हुए तो मैं हरीश रावत के साथ खड़ा हो गया। दरअसल, मुझसे धोखा हुआ था। दिल्ली में मुझे उद्योग भवन बुलाया गया जहां सुरेश पचौरी ने कहा कि तुम सीएम फाइनल हो गए हो। यहां तक कि गुलाम नबी और अहमद पटेल को धन्यवाद देने तक को कहा गया। हरीश के साथ इसलिये खड़ा हुआ था कि वे बहुगुणा की मुखालफत कर रहे थे।
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क्या भाजपा में लो प्रोफाइल हो गये हैं हरक?

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अजय भट्ट के साथ हरक स‌िंह रावत - फोटो : AmarUjala
आपके भाजपा में आने पर पोस्टर लगे थे, ‘आ गया हरक, पड़ गया फर्क’, लेकिन अमित शाह की रैली में तो आप दूसरी पंक्ति में थे?

मुझे प्रदेश कोर कमेटी के 11 लोगों में शामिल किया है। हम उनकी सभी रणनीतियों का हिस्सा रहे। हमारा उपयोग किया जा रहा है। 9 से 20 तक अगस्त मुझे पर्दाफाश कार्यक्रम की जिम्मेदारी दी गई है। प्रदेश के प्रमुख सात आठ भाजपा नेताओं बहुगुणा जी, खंडूड़ी जी, निशंक जी सभी के साथ मुझे शामिल किया गया है। 18 मार्च से पहले भाजपा की जो स्थिति थी वह देख लो और अब उसका सर्वे करवा लो आपको फर्क ही नहीं, बड़ा परिवर्तन दिखाई देगा। मैं लो प्रोफाइल नहीं हुआ हूं।
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