दिल्ली में दर्ज रेप के मुकदमे के बाद आरोप-प्रत्यारोप, शह-मात के खेल के बीच पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत विधानसभा चुनाव पर आ गए हैं। हरक का कहना है कि प्रदेश में निष्पक्ष विधानसभा चुनाव तभी संभव हैं जब राष्ट्रपति शासन लगाकर मतदान कराया जाए। उन्होंने रेप प्रकरण में सीबीआई जांच कराने की केंद्र सरकार से मांग की, वहीं कहा कि जब सिर्फ नाम लिए जाने पर उनके खिलाफ मुकदमा हो गया तो महिला ने जिन दूसरे लोगों का नाम लिया है, उन पर भी मुकदमा हो।
हरक सिंह रावत ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि प्रदेश में लोकतंत्र की हत्या हो रही है। कानून व्यवस्था खत्म हो गई है। यह सरकार रहते हुए निष्पक्ष चुनाव नहीं हो सकते हैं। विनियोग बिल के विरोध के बाद सरकार उनके पीछे पड़ गई है। प्रदीप बत्रा, चैंपियन, रेखा आर्य को परेशान करने की साजिश रची गई। प्रदेश की राजनीति गिर गई है। उन्हें परेशान करने के लिए हर हथकंडा अपनाया जा रहा है। सरकार उनके समर्थक युवाओं को रोजगार देने में भेदभाव कर रही है।
महिला की सुरक्षा की मांग
हरक ने सफाई दी कि पहले भी इसी महिला के आरोप पर सीबीआई जांच हुई थी, जिसकी रिपोर्ट में सारे आरोप मनगढ़ंत बताए गए। उन्होंने केंद्र सरकार से इस प्रकरण की फिर सीबीआई से जांच कराने की मांग की, ताकि और किसी के खिलाफ साजिश न हो।
इस संबंध में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से भी उन्होंने बात की है। साथ ही आरोप लगाने वाली महिला की सुरक्षा की मांग की है। उन्होंने कहा कि महिला ने मेरा नाम लिया तो मुकदमा हो गया, अब उन लोगों के खिलाफ भी मुकदमा होना चाहिए जिनके संबंध में उसने बयान दिया है।