देहरादून के प्राथमिक विद्यालय सरस्वती नगर में 103 बच्चे हैं, लेकिन इन बच्चों को केवल एक शिक्षिका पढ़ा रही है। आरटीई के मानक के अनुसार यहां कम से कम तीन शिक्षक होने चाहिए। ऐसे ही प्राथमिक विद्यालय चकराता रोड में 48 बच्चे शिक्षा ले रहे हैं। इस स्कूल में भी एक शिक्षिका है।
स्कूल में मात्र एक शिक्षिका
स्कूल में कम से कम दो शिक्षक होने चाहिए, लेकिन किसी तरह काम चल रहा है। प्राथमिक विद्यालय सय्यदपुर में 45 बच्चे हैं। लेकिन यहां भी किसी तरह काम चल रहा है। स्कूल में मात्र एक शिक्षिका है। इस स्कूल में भी कम से कम दो शिक्षिकाएं होनी चाहिए।
देहरादून राजधानी के ये तीन स्कूल बानगी भर हैं। उत्तराखंड में स्कूलों का यही हाल है। आखिर ऐसी स्थिति में शिक्षक दिवस कैसे सार्थक होगा। आंकड़े बया करते हैं कि प्रदेश में शिक्षकों के करीब 13 हजार पद रिक्त हैं।
मसूरी, ऋषिकेश और देहरादून नगर क्षेत्र में 25 स्कूल ऐसे हैं जो एक शिक्षक के भरोसे हैं। इससे पहाड़ में दूरदराज के स्कूलों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। हाल यह है कि कई स्कूलों को उच्चीकृत किया गया है, लेकिन उनमें शिक्षक नहीं हैं।
स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक ही नहीं
माध्यमिक स्कूलों में 4384 प्रवक्ताओं के पद रिक्त हैं। भले ही शिक्षा मंत्री हर साल क्वालिटी एजूकेशन की बात करते हैं। इसके लिए राज्य परियोजना निदेशालय एसएसए और डायट में शिक्षकों के प्रशिक्षण के नाम पर लाखों रुपया खर्च भी करता है। लेकिन जब स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक ही नहीं होंगे तो कैसे बच्चों की पढ़ाई बेहतर होगी।
आंकड़ों से जानिए हकीकत
शिक्षक संवर्ग - सृजित पद - कार्यरत - रिक्त
प्रवक्ता - 11141 - 6757 - 4384
एलटी - 19222 - 14763 - 4459
बेसिक - 39238 - 35831 - 3407
इंटर कॉलेजों में प्रिंसिपल - 1170 - 433 - 737
हाईस्कूलों में प्रिंसिपल - 954 - 847 - 107
शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने के लिए एक्शन प्लान के तहत कार्रवाई की जा रही है। साढ़े तीन हजार पद प्राविधिक शिक्षा परिषद की ओर से विज्ञापित किए गए हैं। एलटी शिक्षकों को प्रवक्ता के पद पर पदोन्नत किया जा रहा है। वहीं बीएड-टीईटी प्रशिक्षितों की भर्ती की प्रक्रिया चल रही है।
- राधिका झा, शिक्षा महानिदेशक