परवरदिगार की बेशुमार रहमतों का महीना रमजानुल मुबारक आ गया। शुक्रवार को पहला रोजा है।
देहरादून की मसजिदों और घरों में लोगों ने बृहस्पतिवार से तरावीह की नमाज शुरू कर दी। लोगों ने दिन में ही सहरी और इफ्तारी की तैयारी कर ली थी। मुसलिम बहुल क्षेत्रों के बाजारों में रौनक रही।
रमजानुल मुबारक जुमा (शुक्रवार) से शुरू हो रहा है। इससे लोगों में खुशी दोगुनी रही। लोग इसे शुभ मान रहे हैं। नायब शहर काजी सैयद अशरफ हुसैन कादरी का कहना है कि रमजान के तीन अशरे (भाग) होते हैं। यह पहला अशरा रहमतों का होता है। इसमें परवरदिगार की बेपनाह रहमतें बंदों के लिए होती हैं। बंदा अपने रब से जो भी मांगता है उसे मिलता है।
उन्होंने कहा कि रोजा सिर्फ भूखे रहने का नाम नहीं होता। यह जिस्म के हर हिस्से का रोजा होता है। लोगों को बुराई सुनने, बोलने और देखने से बचना चाहिए। इस मुबारक महीने का हर लम्हा अपने रब की इबादत में लगाना चाहिए।
गुरुवार रात शहर के डेढ़ सौ स्थानों पर तरावीह की नमाज अदा की गई। सुबह से सोशल मीडिया पर रमजान की अहमियत से संबंधित संदेश वायरल हो गए।