सरकारी कार्यक्रमों में आने वाले माननीयों का स्वागत और सम्मान अब हस्तशिल्प से तैयार शॉल और बांस, रिंगाल, तांबे से बने मेमेंटो से होगा। प्रदेश के प्राचीन हस्तशिल्प कला को बढ़ावा देने और इस पुस्तैनी पेशे से जुड़े शिल्पियों के उत्पादों की मार्केटिंग के लिए ऐसा किया जा रहा है।
देश-विदेश से आने वाले अतिथियों और सरकारी समारोह में माननीयों को सम्मान में दिए जाने वाले स्मृति चिन्ह की जगह शिल्पियों के हाथों से तराशे गए उत्पाद नजर आएंगे।
उद्योग विभाग की ओर से शासन को प्रस्ताव भेजा गया कि सभी सरकारी महकमे अतिथियों के स्वागत के लिए हिमाद्रि के हस्तशिल्प उत्पादों को तरजीह दें। इसके लिए शासनादेश जारी करने की कवायद चल रही है। इस पहल से हस्तशिल्प कला को बढ़ावा मिलेगा।
साथ ही शिल्पियों द्वारा तैयार विभिन्न प्रकार के उत्पादों की मार्केटिंग भी होगी। उत्तराखंड में हस्तशिल्प उत्पादों का कारोबार बढ़ाने और नई पहचान देने के लिए उद्योग विभाग ने प्रस्ताव तैयार किया है। जिसमें सरकारी विभागों द्वारा दूसरी कंपनियों के शॉल व स्मृति चिन्ह खरीदने के बजाए शिल्पियों के माध्यम से तैयार उत्पाद खरीदने का सुझाव दिया गया।
विभागीय स्तर पर होने वाले कार्यक्रमों में अतिथियों का स्वागत एवं सम्मान के लिए शॉल व स्मृति चिन्ह बाजार से खरीदे जाते हैं। इसकी जगह अगर हस्तशिल्प उत्पादों को तवज्जो दी जाती है तो शिल्पियों के उत्पादों की मार्केटिंग होगी।
उत्तराखंड की प्राचीन हस्तशिल्प कला को प्रोत्साहन मिलेगा। प्रदेश के हस्तशिल्पी बांस, रिंगाल, नेटल फाइबर, हैंड ब्लाक प्रिटिंग, काष्ठ शिल्प, जरी, काष्ठ मनका, जूट वर्क, शॉल, नमदा, ऐपण के अलावा तांबे व लकड़ी से तैयार घर के सजावटी सामान तैयार कर रहे हैं। देश-विदेश से आने वाले लोग इन उत्पादों को ज्यादा पसंद करते हैं।