जनता के पक्ष में खड़े होकर आवाज उठाने वाले कवि, लेखक, पत्रकारों बुद्धिजीवियों, प्रोफेसरों, कलाकारों और छात्रों को देशद्रोही घोषित किया जा रहा है। केंद्र सरकार का प्रतिकार करना हर बुद्धिजीवी, लेखक व भारतीय नागरिक का कर्तव्य बन गया है।
इंदिरानगर बड़ी मस्जिद के इमाम मौलाना सैय्यद इरफान रसूल ने कहा कि केंद्र सरकार देश में विभाजनकारी माहौल उत्पन्न कर देश के धर्मनिरपेक्ष ढांचे पर चोट कर रही है। अंजू राज ने कहा कि केंद्र सरकार फूट डालो और राज करो की नीति पर चल रही है। बसंत कुमार ने कहा कि अधिकांश जनता सीएए के समर्थन में नहीं है।
धरने को कांग्रेस नेता राहुल छिम्वाल, अब्दुल मतीन सिद्दीकी, हेमंत साहू, हेमंत बगड़वाल, शकील सलमानी, मुफ्ती शाहिद रजा जमाल, नफीस अहमद खान आदि ने भी संबोधित किया। वक्ताओं ने सीएम त्रिवेंद्र रावत द्वारा आंदोलन में बाहरी लोगों का हाथ होने वाले बयान की तीखी आलोचना की। आरोप लगाया कि भाजपा जन समस्याओं के समाधान की जगह हर मुद्दे को सांप्रदायिक रंग देने का प्रयास करती है। कार्यक्रम का संचालन शकील अंसारी और कैलाश पांडे ने किया।
धरनास्थल पर जनकवि बल्ली सिंह चीमा ने घर-घर पहुंचा बाबा साहेब का संविधान और भगत सिंह का पैगाम, जय भीम-जय लाल सलाम समेत अन्य रचनाएं सुनाईं।
60 घंटे में थमा तो 12 घंटे बाद फिर शुरू हो गया आंदोलन
सीएए के विरोध में ताज चौराहे और लाइन नंबर आठ में 60 घंटे से आंदोलनरत महिलाओं का धरना बृहस्पतिवार रात करीब 11 बजे खत्म कराकर पुलिस ने राहत की सांस ली थी, लेकिन उसके 12 घंटे बाद अब बुद्ध पार्क में आंदोलन शुरू हो गया। हालांकि यह धरना पहले से ही प्रस्तावित था। माले के जिला सचिव कैलाश पांडे ने बताया कि यह धरना 28 जनवरी को सुबह 11 बजे (72 घंटे) तक चलेगा।