इस पर प्रभावी रोकथाम के लिए रोगियों का वर्गीकरण करने, क्लीनिकल मैनेजमेंट प्रोटोकॉल, होम केयर, सैंपल एकत्र करने की प्रक्रिया अलग की जाएगी। सभी जिला, बेस, संयुक्त चिकित्सालयों में इलाज के लिए आइसोलेशन बेड, वार्ड, आईसीयू, वेंटिलेटर आदि की व्यवस्था करने को कहा गया है।
इन्फ्लूएंजा के मामले में रोगी की पहचान, त्वरित उपचार व मरीज की गंभीर हालत में रेफर करने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। संदिग्ध मौत होने पर मरीज का डेथ ऑडिट होगा। जिसके लिए ऑडिट कमेटी गठित करनी होगी। यह रिपोर्ट तीन दिन के भीतर महानिदेशालय को उपलब्ध करानी होगी।
2019 में आए थे 246 मामले
प्रदेश में सीजनल इन्फ्लूएंजा के पिछले पांच साल में सर्वाधिक मामले 2019 में आए थे। वर्ष 2019 में इसके 246 मामले सामने आए थे, जिनमें से 06 मरीजों की मौत भी हुई थी। वहीं, 2018 में नौ मामले आए और दो मरीजों की मौत हुई। 2020 में 13 मामले आए और एक मरीजों की मौत हुई। 2021 और 2022 में सरकारी रिकॉर्ड में कोई मामला सामने नहीं आया।