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ज्ञान गोदड़ी यात्रा के श्रद्घालुओं ने दी गिरफ्तारी

Tue, 19 Nov 2013 08:02 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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ज्ञान गोदड़ी यात्रा को हिमाचल के रास्ते उत्तराखंड में प्रवेश करने वाले सिख समुदाय के लोगों ने सामूहिक गिरफ्तारी दे दी है। सिखों का यह जत्था हरिद्वार में हर की पैड़ी के लिए कूच कर रहा था।
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भारी पुलिस फोर्स तैनात
उत्तराखंड की सीमा आने से रोकने के लिए क्षेत्र में भारी पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई थी। पुलिस ने पहले ही साफ कर दिया था कि जबरन घुसने की कोशिश करने वालों को गिरफ्तार किया जाएगा। मंगलवार को दोपहर 12 बजे उत्तराखंड बॉर्डर के कुल्हाल पुल पर हर की पैड़ी जा रहे इस जत्थे को भारी पुलिस बल ने रोक दिया।

यह जत्था संत बाबा बलजीत सिंह जाडूवाल की अगुवाई में बड़ी संख्या में सिख समुदाय के लोग यहां पहुंचे। इस दौरान पुलिस और जत्थे में शामिल लोगों पुलिस का विरोध करके हरबर्टपुर की ओर बढ़ रहे थे। जहां इन लोगों ने पुलिस के सामने सामूहिक गिफ्तारी दे दी।
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चोरी छिपे प्रदेश में घुस सकते हैं कुछ लोग
आशंका थी कि यात्रा में शामिल कुछ लोग रविवार को चोरी छिपे प्रदेश में घुस सकते हैं। ऐसे में सहसपुर थाना क्षेत्र से लेकर हिमाचल उत्तराखंड के बॉर्डर पर स्थित कुल्हाल चौकी तक पुलिस और पीएसी तैनात की गई थी। एसपी देहात जेएस भंडारी ने कहा कि शासन के निर्देश पर यात्रा को प्रदेश में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा।

अगले कुछ दिनों तक बॉर्डर पर पुलिस बल तैनात रहेगा। जबरन प्रवेश करने पर लोगों की गिरफ्तारी की जाएगी। मालूम हो कि लंबे समय से सिख समुदाय के लोग हर की पैड़ी पर ज्ञान गोदड़ी गुरुद्वारा बनाने की मांग कर रहे हैं। पिछले साल भी राज्य में प्रवेश करने से रोके जाने पर यात्रा में शामिल लोगों ने सांकेतिक गिरफ्तारी दी थी।

क्या है ज्ञान गोदड़ी विवाद
हरकी पैड़ी के पास लंढौरा भवन विद्यमान था। 1974 के कुंभ से पूर्व घाट विस्तारीकरण योजना के अंतर्गत लंढौरा हाउस सहित कई इमारतें गिरा दी गईं।  इस स्थल पर संजय पुल का निर्माण किया गया। पुल के नीचे भारत स्काउट एंड गाइड का कार्यालय चल रहा है।

सिख समाज इसे ज्ञान गोदड़ी का स्थल बताते हुए कहता कि यहां पर गुरुनानक देव आए थे। सिख समाज इसे गुरुद्वारा ज्ञान गोदड़ी बताते हुए इस स्थल को स्काउट एंड गाइड से लेने की मांग करता आया है। इसके विपरीत स्काउट एंड गाइड के अध्यक्ष वीरेन्द्र तिवारी का कहना है कि यहां कोई गुरुद्वारा नहीं था और स्काउट का दफ्तर यहां पिछले 95 सालों से चल रहा है।
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