भारतीय गोरखा परिसंघ की ओर से दून में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन का मुद्दा उठाया गया। कार्यकारिणी बैठक में विशिष्ट अतिथि एवं सांसद गौरव गोगाई ने कहा कि एनआरसी में तमाम खामियां हैं। एनआरसी की सूची में गोरखालियों, असमिया, बंगाली समुदाय के ऐसे लाखों लोगों के नाम छूट गए हैं जो कई दशक से असम, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम व अन्य प्रदेशों में रह रहे हैं। इनके अलावा असम, पश्चिम बंगाल, अरुणाचल प्रदेश समेत तमाम राज्यों के विकास में गोरखालियाें का बहुत अधिक योगदान है। सांसद गौरव गोगाई ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे को संसद में भी उठाया है।
वक्ता जोएल राई ने कहा कि केंद्र सरकार ने साल 1960 में चीन की सीमा से सटे अरुणाचल प्रदेश के बंजर इलाके विजयनगर में गोरखा समुदाय के लोगों को कई जगह जमीन आवंटित की थी। केंद्र सरकार की मंशा थी कि चीन इस इलाके में कब्जा न कर सके, इसके लिए क्षेत्र में आबादी होना जरूरी है, लेकिन अब इन लोगों को परमानेंट रेजीडेंट सर्टिफिकेट (पीआरसी) नहीं जारी किया जा रहा है। जिसके चलते इन क्षेत्र के लोगों के सामने भारतीय होने का संकट खड़ा हो गया है। ऐसी ही स्थिति मिजोरम, सिक्किम व मेघालय जैसे राज्यों के कई इलाकों में हैं।
राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में परिसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखमन मोक्तान, कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. मुनीष तमांग, उपाध्यक्ष जोएल राई समेत कई वक्ताओं ने संबोधित किया। इस दौरान गोरखालैंड के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। बैठक में परिसंघ की महिला शाखा अध्यक्ष उपासना थापा, गोरखाली सुधार सभा अध्यक्ष पद्म सिंह थापा, कर्नल डीएस खड़का, अभय खलिंगा, अरुण उपाध्याय, बीएल सुब्बा, नंदा कीरात देवांग, लाख्पा लामा, यान धीमोरे आदि उपस्थित थे।
सिक्किम के मुख्यमंत्री समेत कई सांसद नहीं हुए शामिल
गोरखा परिसंघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में सिक्किम के मुख्यमंत्री पीएस तमांग, दार्जिलिंग के सांसद राजू बिष्ट, सिक्किम के सांसद इंद्राहाडग सुब्बा समेत गणमान्य को शामिल होना था लेकिन पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली के निधन के चलते लोग कार्यकारिणी की बैठक में शामिल नहीं हो पाए।
गढ़ी कैंट स्थित गोरखाली सुधार सभा के सभागार में भारतीय गोरखा परिसंघ के वार्षिक राष्ट्रीय कार्यक