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जमानत तक नहीं बचा पाए थे चुनावी दिग्गज

Fri, 04 Apr 2014 01:16 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
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पिछले दो लोक सभा चुनावों को देखा जाए तो प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा के बीच ही मुकाबला रहता आया है।
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43 की जमानत जब्त हुई
हाल यह है कि 2009 में कुल 76 प्रत्याशी मैदान में उतरे थे, जिनमें से 64 ने अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए। इसी तरह 2004 में कुल 54 उम्मीदवार मैदान में थे जिनमें से 43 की जमानत जब्त हुई।

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राज्य गठन के बाद से हुए दो लोक सभा चुनाव में प्रत्याशियों को मिले वोट बता रहे हैं कि अधिकतर वोट या तो कांग्रेस या फिर भाजपा के कब्जे में रहे। 2004 के लोक सभा चुनाव में हरिद्वार संसदीय सीट जरूर सपा के खाते में गई।
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पर पांचों सीटों पर चुनाव लड़ने वाली सपा केवल आठ प्रतिशत वोट ही हासिल कर पाई। मतलब यह कि हरिद्वार को छोड़कर बाकी सभी संसदीय सीटों पर सपा के प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई।

कांग्रेस को भी लगा था झटका
2004 के चुनाव में कांग्रेस को भी झटका लगा था। कांग्रेस केवल एक सीट जीत पाई थी और बाकी चारों सीटों पर उसे हार का मुंह देखना पड़ा था।

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एक सीट पर कांग्रेस प्रत्याशी की जमानत तक जब्त हुई। भाजपा को पांचों सीटों पर हार का मुंह देखना पड़ा पर भाजपा के सारे प्रत्याशी अपनी जमानत बचाने में सफल रहे।

इसी तरह 2009 के लोक सभा चुनाव में पांचों सीट कांग्रेस के खाते में आई पर रनर अप रहे भाजपा के किसी भी प्रत्याशी की जमानत जब्त नहीं हुई। इस चुनाव में कुल 76 प्रत्याशी मैदान में थे जिनमें से 64 की जमानत जब्त हुई।
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मतलब कांग्रेस-भाजपा के अलावा केवल बसपा के ही दो प्रत्याशी थे जो जमानत बचा पाए। जाहिर है कि प्रदेश में कांग्रेस और भाजपा ही सीधी टक्कर होती आई है। कांग्रेस या भाजपा के प्रत्याशी हारे भी तो भी जमानत बचाने लायक वोट लेने में सफल रहे हैं।

ये हुआ था हाल
2009
कुल प्रत्याशी - 76
जमानत जब्त हुई - 64
2004
कुल प्रत्याशी - 54
जमानत जब्त हुई - 43
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