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SGST बिल विधानसभा में पेश, अब जरा सी चूक करा सकती है पांच साल की जेल

Mon, 01 May 2017 08:41 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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प्रदेश सरकार ने सोमवार को विधानसभा में माल एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक,2017 सदन में पेश कर दिया। मंगलवार को चर्चा के बाद विधेयक पारित किया जाएगा।
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विधेयक में वित्तीय अभिलेख बदलने या उसमें झूठे तथ्य दर्शाने के दोषी को छह महीने तक का कारावास हो सकता है। दोषसिद्ध व्यक्ति के दोबारा दोषी पाए जाने पर पांच साल की जेल का प्रावधान किया गया है। अपील की सुनवाई के लिए बाकायदा एक अधिकरण का गठन होगा।  

वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने सदन के पटल पर विधेयक रखा। इसके बाद उन्होंने कहा कि राज्य में जीएसटी लागू होने के साथ 17 प्रकार के करों की व्यवस्था समाप्त हो जाएगी और इसके एवज में सिर्फ माल एवं सेवा कर वसूला जाएगा।
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एल्कोहल व पेट्रोलियम पदार्थ समेत छह वस्तुओं को अगले पांच साल तक के लिए जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया है। इन सभी पर वैट बरकरार रहेगा।

वित्त मंत्री ने दावा किया कि जीएसटी लागू होने से देशभर में वस्तुओं के दाम में एकरूपता आ जाएगी और राज्य में वस्तुओं के दाम कम होंगे। उन्होंने एकल कर प्रणाली से राज्य के राजस्व में भी बढ़ोत्तरी की संभावना व्यक्त की। उन्होंने बताया कि वर्तमान अप्रत्यक्ष कर प्रणाली में कतिपय कठिनाइयों की वजह से एकल कर प्रणाली लागू की जा रही है।

इसके तहत केंद्र सरकार जहां केंद्रीय माल एवं सेवा कर के रूप में कर वसूलेगी तो वहीं राज्य सरकार इसे राज्य माल एवं सेवा कर के रूप में वसूल करेगी। विधेयक में कर के चार स्लैब प्रस्तावित हैं।

अब ये तैयारी करेगी सरकार

किस वस्तु पर कौन सा स्लैब लागू होगा, इसका निर्धारण जीएसटी काउंसिल करेगी। विधेयक में अधिकारियों को बकाया वसूली, निरीक्षण, तलाशी, अभिग्रहण और गिरफ्तारी की शक्तियां देने का कानूनी प्रावधान है। अपीलों की सुनवाई के लिए अपील अधिकरण की स्थापना करने, कर भार के फायदों को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने और मुनाफाखोरी रोकने के लिए कानून का प्रावधान भी शामिल है।

अब ये तैयारी करेगी सरकार
जीएसटी लागू करने के लिए सरकार ने आगे के होमवर्क पर काम करना शुरू कर दिया है। वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने बताया कि अधिनियम बनने के बाद 18 व 19 मई को जीएसटी काउंसिल की बैठक में कर की दरों का निर्णय लिया जाना है।

जिलास्तर तक चलेगी ट्रेनिंग
विधिक प्रावधानों व साफ्टवेयर की तकनीकी जानकारी के लिए प्रशिक्षण कार्य जारी है। इसके तहत 10 मास्टर ट्रेनर तैयार किए गए हैं। वाणिज्यकर मुख्यालय में पांच बैंचों में करीब 200 अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया है। संभाग व जिलास्तर तक प्रशिक्षण देने का कार्यक्रम है।

नेटवर्क की समस्या का निदान
व्यापारियों को ऑनलाइन रिटर्न फाइल करने में इंटरनेट कनेक्टिविटी की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। विभाग के हर कार्यालय में यू-स्वान के अलावा रेडियो फ्रीक्वेंसी प्रणाली स्थापित की गई है।
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उद्योगों को छूट

vidhansabha - फोटो : amarujala
75478 डीलर्स पंजीकृत
10 लाख रुपये के टर्नओवर वाले व्यापारी जीएसटी के दायरे में आएंगे। वैट की अदायगी करने वाले 97,907 डीलर्स में से अब तक 75478 डीलर्स(78 प्रतिशत)नामांकन करा चुके हैं। शेष के  पंजीकरण के प्रयास चल रहे हैं।

ढांचे का होगा पुनर्गठन
जीएसटी में मनोरंजन कर के कार्मिकों का वाणिज्य कर विभाग में संविलयन होगा। इसके लिए सेवा नियमावली, संरचनात्मक ढांचे के पुनर्निर्धारण की कार्यवाही यथाशीघ्र की जाएगी।

उद्योगों को छूट
जीएसटी लागू होने के बाद सिडकुल के तहत स्थापित निर्माण इकाइयों को आबकारी डयूटी तो अदा करनी होगी, मगर केंद्र(58 प्रतिशत) व राज्य(42 प्रतिशत) इसे लौटाएंगे। ये सुविधा 2020 तक मिलेगी।

कर वसूली में 17.18 फीसदी बढ़ोत्तरी
राजस्व हानि की प्रतिपूर्ति के लिए जीएसटी में वर्ष 2015-16 को आधार वर्ष निर्धारित किया गया है। इसके तहत 14 प्रतिशत राजस्व वृद्धि के आधार पर राज्यों को प्रतिपूर्ति करने की व्यवस्था है। 2015-16 में राज्य ने 6096.24 करोड़ राजस्व जुटाया था। करीब 17.18 फीसदी की बढ़ोत्तरी दर से 2016-17 में यह  7143.35 करोड़ रुपये हो गया।
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