उन्होंने कहा कि पूरे मामले के न्यायिक पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है। जो भी जरूरी होगा, वो सरकार करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार हाईकोर्ट की खंडपीठ के फैसले के खिलाफ एसएलपी में जाएगी। उधर, कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी ने आरोप लगाया है कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय में सरकारी वकीलों की कमजोर पैरवी के चलते समूह ‘ग’ के पद भी राज्य निवासियों के लिए सुरक्षित नहीं रह गए हैं।
अदालत का फैसला आने के बाद कार्मिक विभाग ने न्याय विभाग से जहां कानूनी सलाह मांगी है, वहीं विभाग उन राज्यों की समूह ‘ग’ की भर्ती प्रक्रिया का भी अध्ययन कर रही है, जहां स्थानीय युवाओं के हित सुरक्षित रखे गए हैं। अपर मुख्य सचिव कार्मिक राधा रतूड़ी ने इसकी पुष्टि की है। सूत्रों के मुताबिक, पड़ोसी राज्य उत्तरप्रदेश, हिमाचल के अलावा पंजाब, हरियाणा और अन्य प्रदेशों में समूह ‘ग’ की भर्ती प्रक्रिया के संबंध में रिपोर्ट तैयार की जा रही है। सरकार आश्वस्त है कि उससे स्थानीय अभ्यर्थियों को राहत देने का कोई न कोई रास्ता मिल जाएगा।