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लैंसडौन जंगल में बनेगा पहला ग्रीन फ्लाईओवर

Sun, 08 Jun 2014 02:30 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, हल्द्वानी
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अगर बात फाइलों और दावों से बाहर निकली तो उत्तराखंड में पहला ग्रीन फ्लाईओवर अस्तित्व में आ सकता है।
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बनेगा 7.5 किमी लंबे फ्लाईओवर
विकास और वन्यजीव सुरक्षा दोनों के मद्देनजर लैंसडौन वन प्रभाग में 7.5 किमी लंबे फ्लाईओवर बनाने की संस्तुति सीसीएफ धनंजय मोहन की रिपोर्ट में की गई है।

यह रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। फ्लाईओवर बनने से कोटद्वार से देहरादून आने-जाने के लिए यूपी के सड़क मार्ग के इस्तेमाल की बाध्यता खत्म होगी।

कुमाऊं के अलावा कोटद्वार (पौड़ी जिले) के लोगों को देहरादून जाने के लिए यूपी के मार्गों (वाया नजीबाबाद) का इस्तेमाल करना पड़ता है।

इस मार्ग के अलावा लैंसडौन वन प्रभाग के अंदर कोटद्वार-चिल्लरखाल-लालढांग-गैंडीखत्ता-हरिद्वार वन मोटर मार्ग भी है, जिसका इस्तेमाल सीमित संख्या में वाहन चालक करते हैं।

शासन को भेज दी गई है रिपोर्ट
इसमें चिल्लरखाल से लालढांग के बीच 11.5 किमी का वन मार्ग घने जंगल में है, इसमें तीन किमी का मार्ग पहले बना हुआ है, पर बाकी की सड़क कच्ची है, जिसे बनाने की मांग लंबे समय से उठती रही है।
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जंगलात के अध्ययन में यह बात सामने आई है कि मार्ग के चारों तरफ जंगल में वन्यजीवों की अच्छी-खासी संख्या है।

मार्ग बनने से वन्यजीवों की सुरक्षा आदि पर प्रभाव पड़ सकता था, इसके मद्देनजर मुख्य वन संरक्षक धनंजय मोहन के निर्देशन में एक समिति का गठन किया गया था।

सूत्रों के अनुसार ट्रेनिंग में जाने से पहले सीसीएफ धनंजय मोहन ने रिपोर्ट शासन को भेज दी है।

इसमें चिल्लरखाल से लालढांग के बीच 7.5 किमी लंबा फ्लाईओवर बनाने की संस्तुति की गई है, इसमें वाहन फ्लाईओवर के जरिए जंगल के ऊपर की ओर से जाएंगे और वन्यजीव नीचे रहेंगे।

इससे जंगल और वास स्थल पर कोई प्रभाव भी नहीं पड़ेगा। फ्लाईओवर के चारों तरफ जंगल होने से इसे ग्रीन फ्लाईओवर नाम दिया जा रहा है। इस फ्लाईओवर के जरिए राज्य की छवि को भी चमकाने की मंशा है।
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अधिकारियों के अनुसार अगर यह फ्लाईओवर बना तो संभवत: देश का यह पहला राज्य होगा, जहां पर वन्यजीवों के लिए इतना बड़ा फ्लाईओवर बनेगा। इससे विकास और वन्यजीव सुरक्षा दोनों का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।
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