उत्तराखंड सरकार ने हाइब्रिड और सीएनजी वाहनों पर मिलने वाली ग्रीन सेस छूट को समाप्त करने का निर्णय लिया है। यह कदम राज्य के राजस्व पर पड़ रहे विपरीत प्रभाव को देखते हुए उठाया गया है। कैबिनेट बैठक में यह निर्णय लिया गया।
कैबिनेट में आए प्रस्ताव में कहा गया कि यह बदलाव उत्तराखंड मोटरयान कराधान सुधार अधिनियम, 2003 के तहत किया जाएगा। इस अधिनियम के तहत, राज्य में पंजीकृत और बाहर से आने वाले व्यावसायिक व निजी वाहनों पर प्रवेश उपकर और ग्रीन सेस की दरें निर्धारित हैं।
पहले हाइब्रिड और सीएनजी चालित परिवहन यानों को प्रोत्साहित करने के लिए मोटरयान कर से छूट दी गई थी। अब ये वाहन बाजार में काफी लोकप्रिय हो गए हैं। इनकी बढ़ती संख्या से राज्य के राजस्व को नुकसान हो रहा है। इस स्थिति को देखते हुए, सरकार ने यह निर्णय लिया है। इन वाहनों को चरणबद्ध तरीके से कराधान के दायरे में लाना आवश्यक है।
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कैबिनेट में आए प्रस्ताव में कहा गया कि हाइब्रिड और सीएनजी वाहन अब आम प्रचलन में हैं। ये वाहन ईंधन के साथ-साथ बैटरी का भी उपयोग करते हैं। इनकी लोकप्रियता में लगातार बढ़ोतरी हुई है। इन वाहनों को कर से छूट जारी रखने से राजस्व पर नकारात्मक असर पड़ रहा था। सरकार का मानना है कि इन्हें कराधान में लाना राजस्व संतुलन के लिए जरूरी है।