मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखकर अर्द्धकुंभ के लिए 500 करोड़ रुपये देने की मांग की है। इसी के साथ प्रदेश के लिए हर साल दो हजार करोड़ रुपये का ग्रीन बोनस भी मांगा है। मुख्यमंत्री के मीडिया प्रभारी सुरेंद्र कुमार के मुताबिक मुख्यमंत्री का कहना है कि 166.67 करोड़ रुपये की संस्तुति के बावजूद अभी तक राज्य को अर्द्ध कुंभ के लिए कोई पैसा नहीं मिला है।
यदि 500 करोड़ रुपये की पूरी धनराशि अभी दी जानी संभव नहीं है तो 2016-17 के केंद्रीय बजट में इसका प्रावधान किया जाए। प्रदेश सरकार अपने संसाधनों से अर्द्धकुंभ में पैसा खर्च कर रही है। अधिकतर निर्माण कार्य स्थायी प्रकृति के हैं।
बाह्य सहायता परियोजनाओं का फंडिंग पैटर्न 90:10 या 80:20 करने की मांग भी मुख्यमंत्री ने की है। सीएसटी के अंतर्गत 1170 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति की जाए। केंद्रीय बजट से पहले लिखे गए पत्र में मुख्यमंत्री ने कहा है कि प्रदेश की बहुत सी जलविद्युत परियोजनाओं सहित अनेक परियोजनाओं पर अनेक कारणों से रोक लगाई गई है। यह रोक हटनी चाहिए।
मुख्यमंत्री के मुताबिक प्रदेश का 70 प्रतिशत भाग फॉरेस्ट कवर है और 14 प्रतिशत भाग नेशनल पार्क और वन्य जीव अभ्यारण्यों के तहत है। यहां का ग्रीन कवर देश को अमूल्य पर्यावरण सेवाएं प्रदान कर रहा है। इन सेवाओं का मूल्य देश की लेखा प्रणाली में शामिल किया जाना चाहिए और राज्यों को वित्तीय संसाधनों के हस्तांतरण के फार्मूले में लिया जाना चाहिए। विभिन्न शोध पत्रों में उत्तराखंड की पर्यावरणीय सेवाओं का मूल्य लगभग 30 हजार करोड़ रुपये प्रतिवर्ष आंका गया है।
जब तक यह व्यवस्था नहीं होती, तब तक उत्तराखंड को दो हजार करोड़ रुपये प्रतिवर्ष का ग्रीन बोनस दिया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने रोपवे, केबल कार, एस्केलेटर आदि को प्रोत्साहित करने की मांग भी की है। इसके साथ ही नर्सिंग कालेज सहित अन्य मामलों में भी बजट में प्रावधान करने की मांग की गई है।