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उत्तराखंडः संरक्षित होंगी लुप्त हो रही घास की 185 प्रजातियां, यहां बनी नर्सरी

Fri, 26 Apr 2019 11:03 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राजीव पांडेय, अमर उजाला, हल्द्वानी
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फाइल फोटो
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प्रदेश में लुप्त हो रही घास की प्रजातियों का वन अनुसंधान केंद्र संरक्षण करेगा। इसके लिए रानीखेत नर्सरी में घास की करीब 185 प्रजातियां रोपी जा रही हैं। वन विभाग ने करीब 25 प्रजातियों की घास को नर्सरी में संरक्षित कर लिया है।

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उत्तराखंड में करीब 185 प्रजातियों की घास पाई जाती है। इनमें से पांच-छह प्रजातियों को छोड़कर सभी लुप्त होने की कगार पर हैं। पहाड़ पर चारे का संकट भी बना रहता है। इसी कारण वन अनुसंधान केंद्र ने प्रदेश में पाई जाने वाली घासों पर शोध शुरू कराया। पता चला कि करीब 185 प्रजाति की घास प्रदेश में हैं, लेकिन यह घास कुछ विशेष क्षेत्र तक सीमित रह गई हैं।

इस कारण वन विभाग ने इन घासों को एक जगह संरक्षित करने का निर्णय लिया। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से 25 घास की प्रजातियों को रानीखेत की द्वारसौ नर्सरी में रोपा गया है। कैंपा योजना के तहत इसकी 0.15 हेक्टेयर में प्लाटों में नर्सरी तैयार की गई है।
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500 से 5000 मीटर ऊंचाई पर उगती हैं घास
प्रदेश में मिलने वाली 185 प्रजातियों की घास तराई भाबर से लेकर उच्च हिमालयी क्षेत्र में पाई जाती हैं। यह 500 मीटर से लेकर 500 हजार मीटर तक की ऊंचाई पर उगती हैं। बता दें कि भारत में 255 वंशों की 1225 घास मिलती है। घास की प्रजाति जैव विविधता, पर्यावरण संरक्षण और संतुलन में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। घास का चारे के अतिरिक्त मृदा शक्ति बढ़ाने, संरक्षण और औषधीय महत्व भी होता है।

इन घासों को रोपा गया
रानीखेत के द्वारसौ नर्सरी में लव, कुश, नेपियर, वाबिला, गिन्नी, दोलनी, गुच्छी, सीता, औंस, कांस, कुमेरिया, दूब, लेमन, बिच्छू, नलिका, गोड़िया, राई, ब्रूम, चित्रा, अंगोरा, जंगली मड़ुवा, मसाण, जैई व गुईना घास की रोपाई की गई है।

प्रदेश में घासों की कई प्रजातियां लुप्त हो रही हैं। ऐसे में इनका पता लगाकर एक स्थान पर इसकी नर्सरी तैयार की जा रही है। 25 प्रजातियों की घास द्वारसौ नर्सरी में लगाई गई है। 
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-संजीव चतुर्वेदी, वन संरक्षक अनुसंधान, उत्तराखंड

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