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उत्तराखंड: 5500 ग्राम प्रधानों ने दिया सामूहिक इस्तीफा, विभागों में हड़कंप

Tue, 04 Jul 2017 01:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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अपनी मांगों को लेकर सोमवार को उत्तराखंड के 5500 ग्राम प्रधानों ने एक साथ इस्तीफा दे द‌िया। इसके चलते शासन व प्रशासन में हड़कंप मच गया। 
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बता दें क‌ि राज्य वित्त आयोग की ओर से ग्राम पंचायतों के बजट में कटौती के विरोध में सोमवार को राज्य के 5500 ग्राम प्रधानों ने सामूहिक इस्तीफा दे दिया।

ग्राम प्रधानों ने मानदेय 750 से बढ़ाकर 5000 रुपये करने और पंचायतीराज एक्ट लागू होने के बाद नियमावली जल्द लागू करने की मांग उठायी है।
उत्तराखंड ग्राम प्रधान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष गिरवीर परमार के आह्वान पर प्रदेश के ग्राम प्रधान सोमवार को जिलों के विकास भवन और ब्लाक मुख्यालयों पर जुटे।
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इस दौरान मांगों को लेकर प्रदर्शन के बाद अधिकारियों को इस्तीफे सौंप दिए। ग्राम प्रधानों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सरकार जल्द विचार नहीं करती है तो राज्यव्यापी आंदोलन शुरू कर दिया जाएगा।

प्रदेश अध्यक्ष गिरवीर परमार का कहना है कि राज्य वित्त्त आयोग की ओर से बजट में बड़ी कटौती कर दी गई है। इसका सीधा असर ग्राम पंचायतों के विकास पर पड़ेगा। 
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व‌िभागों में हड़कंप, सरकार बेखबर

इसके अलावा ग्राम प्रधानों को महज 750 रुपये मानदेय दिया जा रहा है जो वर्तमान जिम्मेदारियों को देखते हुए बहुत कम है इसे बढ़ाकर 5000 रुपये मासिक करने की जरूरत है।

परमार का आरोप है कि सरकार ने पंचायतीराज एक्ट पारित कर दिया, लेकिन नियमावली जारी करने में आनाकानी कर रही है। प्रदेश अध्यक्ष गिरवीर परमार के अनुसार मांगों को लेकर पहले भी ब्लाक मुख्यालयों प्रदर्शन और तालाबंदी कर चेतावनी दी गई थी, लेकिन शासन-प्रशासन ने सुध नहीं ली।

ऐसे में सामूहिक इस्तीफे का निर्णय करना पड़ा। प्रदेश के सभी 7953 ग्राम प्रधान भी एक दो दिन में इस्तीफा सौंप देंगेे। ग्राम प्रधान संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द नहीं मानी गईं तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। 

दूसरी ओर इस प्रकरण में वित्त मंत्री प्रकाश पंत का कहना है कि ग्राम पंचायतों के बजट में किसी भी प्रकार की कटौती नहीं की गई है। यदि ग्राम प्रधानों को किसी प्रकार की वित्तीय दिक्कत थी तो उन्हें पहले वार्ता करनी चाहिए थी।

​समस्या का समाधान किया जाता। वहीं पंचायतीराज मंत्री अरविंद पांडे ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया है कि उन्हें ग्राम प्रधानों के इस्तीफे की जानकारी नहीं है।
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